हमें कई चीज़ें बिना किसी मेहनत के ही मिल जाती हैं, मम्मी-पापा की बदौलत. हमें लगता है कि वो है तो सब ठीक ही होगा. हम उनके बिना कभी अपनी ज़िन्दगी के बारे में सोच भी नहीं सकते.


हालांकि दुनिया में कई लोग हैं जो माता-पिता के बिना ही जीना सीखते हैं. अपने दम पर ही सबकुछ हासिल करते हैं. गिरते हैं, फिर ख़ुद ही उठते हैं.

Humans of Bombay ने एक ऐसी ही लड़की की कहानी साझा की जिसने 18 साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया.

वो 8 साल से कैंसर से जूझ रही थीं, पर उनकी मृत्यु ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया. उस दिन पहली बार सालों में मैं उन्हें Goodbye Kiss करना भूल गई थी. मुझे अंदर से लग रहा था कि मुझे वापस जाना चाहिए.

जिस दिन वो अपनी मां को Kiss करना भूली उसी दिन शाम में उसकी मां की मौत हो गई. अंतिम-संस्कार के लिए ATM से पैसे निकालते हुए उसने अपनी मां जैसा ही सशक्त और आत्मनिर्भर बनने का दृढ़ निश्चय किया.

वो एक सच्ची फ़ाइटर थी. मुझे हमेशा उनके साथ ज़्यादा वक़्त न बिता पाने का मलाल रहेगा. वो सब इतनी जल्दी में हुआ कि उसकी हक़ीक़त मुझे 1 साल बाद समझ आई.

मास्टर्स के लिए विदेश जाने के बाद उसे अपनी मां की कमी ख़लने लगी. उसे तब ये एहसास हुआ कि उसकी मां कभी वापस नहीं आएगी. छोटी-छोटी बातें परेशान करने लगी.

मैं उनके साथ रोड ट्रिप पर कैसे जाउंगी, बातें कैसे करूंगी या फिर एक सेल्फ़ी भी कैसे लुंगी? मैं अवसाद ग्रसित हो गई और पढ़ाई छोड़ घर आने का निर्णय लिया. वो मुश्किल निर्णय था पर मैंने लिया.

घर आकर उसने हर वो काम करने की सोची जो उसके लिस्ट में थी. उसने अपने हर सपने को पूरा किया. मास्टर्स पूरा किया, नौकरी भी मिल गई और जब कुछ करने को नहीं रहा तो उसने ट्रैवल किया.

2017 में मैं मुंबई में काम कर रही थी और मैंने 365 दिनों में 29 राज्य घूमने का निर्णय लिया. मैंने दोस्तों के साथ ट्रैवल किया, अजनबियों के साथ Hitchiking की, बिना नेटवर्क के 25 दिन रही, नॉर्थ-ईस्ट के हाई-वे पर लापता हुई, यूपी में बिना टिकट ट्रैवल किया और यहां तक कि एज़वाल में फंसी.

नौकरी और कम बजट के साथ ये आसान नहीं था पर हर बार गिरने के बाद वो ख़ुद उठी. आज उसने अपनी कंपनी खोल ली है, देश घूम चुकी है और दुनिया घूम रही है.