सुखी और स्वस्थ जीवन कौन नहीं चाहता? हर किसी की चाहत होती है कि वो हमेशा ही फिट रहे, अकसर देखा जाता है कई लोग दिव्यांगों के बारे में भला-बुरा कहते रहते हैं. कोई कहता है कि शायद इसने पिछले जन्म में बुरे कर्म किये होंगे इसलिए ये दिव्यांग है. कोई कहता है कि जो इसकी किस्मत में था वो इसे मिला लेकिन कुछ ऐसे भी दिव्यांग हुए, जिन्होंने सुनी सबकी मगर अपना संघर्ष करना कभी नहीं छोड़ा. अगर हम अपने आस-पास ही देखें, तो ऐसे कई उदाहरण मिल जायेंगे, जहां शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद लोगों ने कभी हार नहीं मानी और अपनी किस्मत खुद लिखी. 

सुधा चंद्रन

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सुधा चंद्रन को भारत की मशहूर डांसर के तौर पर पहचाना जाना जाता है. ये वो महिला हैं, जिनके संघर्ष की कहानी को स्कूलों में बच्चों को प्रेरणा के लिए पढ़ाया जाता है. एक पैर न होने के बावजूद सुधा मंच पर गज़ब का डांस करती हैं. 3 साल की उम्र से डांस सीखने वाली सुधा का एक एक्सीडेंट में दांया पैर घायल हो गया था. उनकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उनका पैर काटना पड़ा, पर सुधा ने हिम्मत नहीं हारी और अपने संघर्ष से लोगों के लिए मिसाल बन गयी.

अरुणिमा सिन्हा

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अरुणिमा राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी होने के साथ-साथ पहली भारतीय दिव्यांग महिला हैं, जिन्होंने माउंट एवेरेस्ट पर चढ़ाई की है. ट्रेन में सफ़र करने के दौरान इनके साथ काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी. कुछ लफ़ंगों ने ट्रेन में अरुणिमा की चेन लूटने की कोशिश की, जब अरुणिमा ने उनका विरोध किया, तो उन बदमाशों ने अरुणिमा को चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया. इस हादसे में अरुणिमा का एक पैर कट गया था.

रविन्द्र जैन

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अपनी बेजोड़ आवाज़ की बदौलत पहचान बनाने वाले रविन्द्र देख नहीं सकते हैं. लेकिन अपनी कमजोरी को उन्होंने कभी अपने लक्ष्य और मंजिल के रास्ते का रोड़ा नहीं बनने दिया, इसी का नतीजा है कि वो आज एक सफ़ल म्यूज़िक डायरेक्टर के तौर पर अपना नाम रौशन किये हुए हैं.

गिरीश शर्मा

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बचपन में एक एक्सीडेंट के दौरान गिरीश का पैर कट गया था, लेकिन फिर भी गिरीश ने कभी हार नहीं मानी और लगन के साथ मेहनत करते रहे. इसी मेहनत के बल पर वो बैडमिंटन चैंपियन भी रह चुके हैं.

शेखर नायक

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शेखर उन लोगों में से एक हैं, जो अपने मज़बूत इरादों से अपनी किस्मत खुद लिखते हैं. आंखों से न देख पाने वाले शेखर ने अपनी मेहनत से अपनी किस्मत को खुद लिखा और समाज की बुराईयों और गरीबी की सीमा को तोड़ कर Blind T20 क्रिकेट के चैंपियन बने. शेखर के नाम एक नहीं, बल्कि 32 सेंचुरी हैं.

प्रीती श्रीनिवासन

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ये एक ऐसी महिला हैं, जिनका स्विमिंग के दौरान गर्दन के नीचे का हिस्सा Paralyzed हो गया था. लेकिन इन्होंने भी कभी हार नहीं मानी और तमिलनाडु महिला अंडर 19 क्रिकेट की कप्तान बनी.

राजेन्द्र सिंह रहेलू

Khelpath

राजेंद्र जब 9 महीने के थे, तब इन्हें पोलियो हो गया गया था. दसवीं क्लास के बाद पढ़ाई छोड़कर राजेंद्र ने स्पोर्ट्स की तरफ़ रुख किया और अपनी दिव्यांगता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. 2014 के कॉमनवैल्थ गेम्स की वेट लिफ्टिंग प्रतियोगिता में उन्होंने सिल्वर मैडल ला कर देश का नाम रौशन किया.

निकोलस जेम्स (Nicholas James Vujicic)

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निकोलस जेम्स ऑस्ट्रेलिया के एक Motivational Speaker हैं, जिन्हें बचपन में ही Phocomelia नामक बीमारी हो गयी थी, जिससे उनके Limbs विकसित नहीं हो पाए. इसके बावजूद जेम्स ने बचपन से ही अपने दैनिक जीवन के कार्यों को खुद करना शुरू किया. इसी वजह से वो आज इस मुकाम पर पहुंच गए हैं कि लोगों को प्रेरित कर रहे हैं.

स्टीफ़न हॉकिंग

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स्टीफ़न हॉकिंग को आज दुनिया में कौन नहीं जानता? ये वो फ़ेमस इंसान हैं, जिन्होंने Motor Neuron नामक बीमारी से लड़ कर विज्ञान की दुनिया में अपना नाम रौशन किया.

Frida Kahlo

Storify

Frida पोलियो की बीमारी से पीड़ित थीं. मैक्सिको की बहतरीन पेंटर होने के साथ-साथ ये Self Portraits और Landscapes के चित्रों को भी बहुत ज़्यादा महत्व दिया करती थीं.

ज़िन्दगी में अगर कुछ अच्छा करना हो तो लगन और मेहनत को बरकरार रख कर लक्ष्य तक कैसे पहुंचा जाए वो हम इन लोगों से सीख सकते हैं. ये वही लोग हैं जिन्होंने अपनी लाइफ़ में कभी हार न मानकर सही मार्ग पर चल अपने नाम के साथ-साथ देश का नाम भी रौशन किया.