ग़रीबी से उठकर कामयाबी पाने वालों की कहानियां आपने बहुत सुनी होंगी. आज हम आपको एक ऐसे द्रोणाचार्य के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने अधूरे सपने को अपने छात्रों की सफ़लता के ज़रिये जी रहा है.

Source: hindustantimes

हम बात कर रहे हैं ओडिशा के रहने वाले 47 वर्षीय अजय बहादुर सिंह की. अजय एक अच्छे परिवार से सम्बन्ध रखते हैं. पिता इंजीनियर थे, तो बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते थे. इसी दौरान अजय को अपने पिता का किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन कराना पड़ा. इसके लिए उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा. घर की माली हालत इतनी ख़राब हो गई थी कि अजय को चाय बेचकर परिवार का भरण पोषण किया.

Source: aninews

इस बीच इतना समय बीत गया कि अजय का डॉक्टर बनने का सपना, सपना ही रह गया. हालांकि अजय ने हार मानने के बजाय अपने उस सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करनी शुरू कर दी. आज अजय हज़ारों लोगों के सपनों को पूरा करने का काम कर रहे हैं.

हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में अजय ने कहा-

'मैं बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहता था. इसके लिए मैंने तैयारी भी शुरू कर दी थी, लेकिन मेरे पिता के किडनी ऑपरेशन के चलते ये हो न सका. इसके बाद मैंने चाय और शरबत बेचकर अपना करियर शुरू किया. 12वीं करने के बाद मैं सोडा बनाने वाली मशीन बेचा करता था. पढ़ाई ख़त्म होने के बाद मैंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ना शुरू किया.'
Source: odishatv

अजय बहादुर सिंह ने साल 2017 में आनंद कुमार के 'सुपर 30' की तर्ज़ पर 'ज़िंदगी' फ़ाउंडेशन कोचिंग क्लासेज़ की शुरुआत की. मकसद था ऐसे ग़रीब बच्चों की मदद करना, जो पढ़ाई में तो अच्छे हैं लेकिन ग़रीबी के चलते प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग क्लासेज़ नहीं जा पाते.

Source: hindustantimes

'इसके बाद हमने ऐसे बच्चों की तलाश शुरू की. हमने उन्हें अपनी फ़ाउंडेशन के साथ जोड़ा, उन्हें यहां फ़्री में रहने, खाने पढ़ने और मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी का मौक़ा दिया. आज इसी का नतीजा है कि साल 2018 में हमारी कोचिंग के 18 छात्रों में से 12 छात्रों को ओडिशा के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में दाख़िला मिला. जबकि इस साल 14 छात्रों ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की परीक्षा पास की.'

'मैं अपने छात्रों से गुरुदक्षिणा के रूप में बस इतना चाहता हूं कि जब वो अपनी ज़िंदगी में सफ़ल हो जाएं ,तो वो भी ग़रीब छात्रों की इसी तरह मदद करें.'

अजय ने अपनी इस सकारात्मक सोच से ये साबित कर दिया कि जब दिल में कुछ कर गुज़रने की तमन्ना हो, तो इंसान एक न एक दिन सफ़ल ज़रूर होता है.