भारतीय इतिहास में कई ऐसे नायक हुए हैं जिनकी वीरता की कहानियों से इतिहास की किताबें भरी पड़ी हैं. लेकिन इन नायकों में से कुछ नायक ऐसे भी थे जिनकी बहादुरी की कहानियां इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह गए.

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आज हम आपको भारतीय इतिहास के कुछ ऐसे ही गुमनाम वीरों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने अपने अपने दौर में भारत को दुश्मनों की बुरी नज़रों से बचाया था-

1- राजा पोरस

पंजाब में झेलम से लेकर चेनाब नदी तक राजा पोरस या पुरुवास का राज्य था. इसकी राजधानी मौजूदा लाहौर के आस-पास थी. राजा पोरस पोरवा के वशंज थे. उनका साम्राज्य वर्तमान पंजाब में झेलम और चेनाब नदियों तक (ग्रीक में हाइडस्पेश और एसीसेंस) था. इतिहासकार बताते हैं कि सिकंदर विश्व विजय पर निकले हुए थे. इस दौरान वो पोरस के राज्य तक पहुंच गए थे, लेकिन पोरस ने सिकंदर के आगे सरेंडर नहीं किया, उनसे टकराव हुआ. 326 ईसा पूर्व में सिकंदर और पोरस के बीच लड़ाई हुई थी. इतिहास में पोरस और सिकंदर की ये लड़ाई काफ़ी चर्चित है.

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2- दाहिर सेन

दाहिर सेन भारत के बडे ही कुशल और धर्म ज्ञानी शासक हुआ करते थे. सिन्ध पर शासन करने वाले वो अन्तिम भारतीय सम्राट थे. दाहिर सेन अपने कुशल शासन और वीरता के लिए प्रसिद्ध थे. वो दाहिर सेन ही थे जिनकी वजह से मुग़ल भारत में प्रवेश करने में असफ़ल रहे. दाहिर सेन ने कासिम को युद्ध में अनेकों बार पराजित किया. हालांकि, कुछ सालों बाद अरब व मुग़ल शासकों की वजह से ही वीरगति को प्राप्त हो गए. इनकी मृत्यु के बाद अरब नरेश मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध को शमशान में बदल दिया था और इनकी पत्नी और दोनों पुत्रों को कासिम ने बंधक बना कर अरब के ख़लीफ़ाओं के पास भेज दिया. लेकिन दोनों पुत्रों ने अरब जा कर उसी के घर में कासिम को मौत के घाट उतारकर और फिर स्वयं भी मौत को गले लगा लिया.

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3- वीर योद्धा तक्षक

हिन्दू वीर योद्धा 'तक्षक' जिसने सिखाया कि देश पर आक्रमण करने वालों से कैसे निपटा जाता है! मोहम्मद बिन कासिम के आक्रमण से एक चौथाई सदी बीत चुकी थी. तोड़े गए मन्दिरों, मठों और चैत्यों के ध्वंसावशेष अब टीले का रूप ले चुके थे. कासिम ने इस दौरान सभी युवाओं को मार डाला था. तक्षक उस वक़्त मात्र 8 वर्ष का था. तक्षक के पिता सिंधु नरेश दाहिर के सैनिक थे जो इसी कासिम की सेना के साथ हुए युद्ध में वीरगति पा चुके थे. जबकि कासिम के सैनिकों के जल्मों से परेशान होकर मां और दोनों बहनों से ख़ुदकुशी कर ली. समय के साथ बाद तक्षक ने कासिम और उसकी सेना को ख़त्म कर हिन्दुस्तान की रक्षा की थी.

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4- वीर योद्धा नागभट्ट

नागभट्ट उज्जैन के शासक हुआ करते थे. वो नागभट्ट ही थे जो दाहिर सेन के बाद भारत के सीमा प्रहरी के रूप में कार्यरत रहे. वीर योद्धा तक्षक ने जिस युद्ध में अरबों (मोहम्मद बिन कासिम) का सर्वनाश किया था उसका नेतृत्व नागभट्ट ने ही किया था. उस युध्द में इन दोनों ने मिलकर मोहम्मद बिन कासिम कि छाती पर ऐसा ताडंव किया था कि अगले 200 वर्षों तक वो भारत की ओर नज़र भी नहीं उठा पायें.

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5- कल्लूक भट्ट

कल्लूक भट्ट 1200 ईसवी के पूर्वी भारत के बहुत बडे समाज प्रवृत्तक थे. इन्होंने महिला शिक्षा और विधवा अधिकारों के लिए कई नेक काम किए. वो जीवनभर भारतीयों को शिक्षित करने का कार्य करते रहे. इस दौरान उन्होंने महिला शिक्षा और विधवा अधिकारों को लेकर 5 किताबें भी लिखी. कल्लूक भट्ट ने जिन विषयों पर किताबें लिखी वो आधुनिक भारत की सबसे बड़ी समस्या है. जिस विषय पर आज भी लोग लिखने से कतराते हैं कल्लूक भट्ट वो विजन सैकड़ों साल पहले ही देख लिया था.

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ये थे वो महानायक जिन्होंने अपने-अपने तरीकों से देश के लिए क़ुर्बानी दी थी.