कहते हैं ख़ूबसूरती देखने वाले की नज़रों में होती है. लेकिन समाज की अगर बात करें तो यहां ख़ूबसूरती के कई पैमाने सेट हो चुके हैं. अब ये पैमाने रंग से लेकर चेहरे की बनावट सब पर निर्भर करते हैं. मतलब रंग गोरा है, तो आपने ख़ूबसूरती का एक पड़ाव बैठे-बैठे ही पार कर लिया. ये रंग की बात हम नहीं कह रहे, बल्कि समाज कहता है. चलिए फिर बात आती है लम्बाई की, शरीर की बनावट की. इसके थोड़ा और डीटेल में घुसा जाए, तो बात नैन-नक्श पर आती है. अब नैन-नक्श में अगर गालों पर गड्ढा पड़ रहा है, तो वो ख़ूबसूरती में गिना जाएगा. गोरे चेहरे पर काला तिल है, तो क्या बात है, आंखें दो अलग रंग की हैं, तो ख़ूबसूरती का काई मैच ही नहीं है. किसी ने क्या खूब लिखा है-

अब हम समझे तेरे रुख़सार पर इस तिल का मतलबहुस्न ए दौलत पर, दरबान बिठा रखा है

एक शायर ही तिल को इतनी ख़ूबसूरती से बयां कर सकता है. वर्ना देखा जाए तो ये हमारी चमड़ी की एक विकृति ही है. हां आपने सही पढ़ा, तिल एक विकृति है और ऐसी कई विकृतीयां हमारे शरीर की हैं, जिन्हें समाज ने ख़ूबसूरती का पैमाना बना दिया है.

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बात शुरु करते हैं गालों पर डिम्पल से. चेहरे की मांसपेशियां जब छोटी होती हैं, तो उससे चमड़ी खिंचती है, जिसकी वजह से चेहरे पर डिम्पल पड़ता है. शरीर में ये विकृती आनुवांशिक होती है यानि आपके माता-पिता में से किसी के भी ऐसा है, तो आपको भी डिम्पल पड़ सकते हैं.

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चेहरे पर तिल आपकी किस्मत से नहीं, बल्कि स्किन में सेल्स की वजह से होता है. तिल तभी बनता है जब त्वचा में कोशिकाएं एक झुंड में बढ़ती हैं, न कि फैल के. ये Melanocytes सेल होते हैं, जो स्किन का प्राकृतिक रंग बनाते हैं.

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अब बात आती है Heterochromia की यानि ऐसी स्थिति की जिसमें इंसान की आंखें दो रंग की होती हैं. Complete Heterochromia में एक आंख की पुतली अलग रंग की होती है और दूसरी अलग. Partial Heterochromia में आंखों की पुतली का एक भाग दूसरे रंग का होता है और बाकी दूसरे रंग का. ये भी शरीर की एक विकृति है, जिसे लोग ख़ूबसूरती मानते हैं.

तो अगली बार कुछ पसंद आए और ख़ूबसूरत लगे, तो इन सामाजिक पैमानों को अपनी भावनाओं के आड़े न आने दीजिएगा. ख़ूबसूरती देखने वालों की नज़रों में होती है याद रखिएगा.