अगर सचिन तेन्दुल्कर को फुटबॉल खेलने पर मजबूर किया जाता, तो शायद दुनिया को ये मास्टर ब्लास्टर न मिलता. जीवन में तरक्की का बड़ा आसान सा तरीका है, जिस काम में दिल लगे उसे अपना प्रोफ़ेशन बना लीजिए. अगर आप ज़बरदस्ती कोई काम करेंगे, तो आपका हाल भी राजनीति के पप्पू जैसा ही होगा न. हर चीज़ की एक एहमियत होती है, वो उसी काम के लिए अच्छा लगता है. इंसान की तरह ये नियम उत्पादों पर भी लागू होता है. दुनिया में कई ऐसे प्रोडक्ट्स हैं, जो बने किसी और काम के लिए और आज दुनियाभर में किसी और काम के लिए प्रसिद्ध हैं.

1. Bubble Wrap

साल 1957 में Al Fielding और Marc Chavannes ने बबल रैप बनाया था दीवारों की शान बढ़ाने के लिए. उन्होंने ये बतौर टेक्सचर्ड वॉलपेपर के रूप में बेचना शुरु किया था, पर लोगों को ये पसंद नहीं आया.

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 बाद में इसे ग्रीनहाउस इंसुलेटर के रूप में बेचने की बात हुई, लेकिन तब भी ये प्रोडक्ट हिट नहीं हुआ. बाद में Fielding और Marc ने इसका सुरक्षा फ़ीचर IBM को बेचा. IBM ने अपने 1401 कम्प्यूटर्स की पैकिंग के लिए इसका इस्तेमाल किया और तब से बबल रैप हिट हो गया. आज बबल रैप पूरी दुनिया में टाइम पास करने के लिए मशहूर है.

2. हेरोइन- 

Bradenton

आज हेरोइन के नशे के दुनिया में लाखों लोग आदि हैं. असल में ये ड्रग मॉर्फिन के नशे से छुटकारा पाने के लिए बनाया गया था. शुरुआत में जर्मन कंपनी Bayer ने इसे बाज़ार में सर्दी-ज़ुकाम की दवाई बता कर बेचना शुरु किया. इसका नाम ‘हेरोइन’ इसलिए रखा गया क्योंकि कंपनी के एक कर्मचारी ने इसे लेने के बाद कहा कि उसे हीरो जैसा लग रहा है. बाद में पता चला कि मॉर्फिन की तरह इसकी भी लोगों को लत लगने लगी थी. बाद में इसे अवैध घोषित कर दिया गया.

3. टी-बैग

 इससे ज़्यादा आराम दायक प्रोडक्ट शायद ही कुछ होगा. मतलब मेरे शब्दों पर नहीं, भाव पर गौर कीजिए. वैसे ये प्रोडक्ट भी किसी और काम के लिए बनाया गया था. 

साल 1908 में न्यूयॉर्क के चाय व्यापारी Thomas Sullivan ने चंद पैसे बचाने के लिए सोचा कि अपनी चाय का सैम्पल वो कांच के जार में नहीं, बल्कि सिल्क के थैले में बेचेंगे और उसके धागे में कंपनी का नाम लिखा रहेगा. जब एक ग्राहक ने उनकी चाय पत्ती खरीदी तो उसने गलती से पूरी थैली चाय में डाल दी और तब से टी-बैग प्रसिद्ध हो गया. कसम से जो होता है अच्छे के लिए ही होता है.

4. चेनसॉ 

 ये ख़तरनाक सा दिखने वाला प्रोडक्ट, जो आज पेड़ काटने के लिए इस्तेमाल होता है, वो असल में हड्डियां काटने के लिए बनाया गया था. डॉक्टर John Aitken और James Jeffray ने इसका इस्तेमाल आॅपरेशन के​ लिए किया था. 19वीं शताब्दी तक इसका इस्तेमाल ऐसे ही हुआ है, उस वक़्त एनस्थीसिया भी नहीं हुआ करता था. बाद में इसकी जगह Gigli Twisted तार ने ले ली. बाद में ये प्रोडक्ट पेड़ काटने के लिए इस्तेमाल होने लगा.

5. Frisbee या फ़्लाइंग डिस्क

अकसर पार्क में आपने बच्चों को फ़्लाइंग डिस्क से खेलते हुए देखा होगा. बिल्कुल आपके जैसे ही Frisbee Pie Company के मालिक ने भी बच्चों को ऐसे ही खेलते देखा था. ये कंपनी Pie बेचती थी और जिस डिस्क में रख कर वो Pie बेचती थी, उससे बच्चे कुछ ऐसे ही खेलते थे. जब कंपनी के मालिक ने ये देखा, तो उसने अपना दिमाग Pie से ज़्यादा फ़्लाइंग डिस्क को बतौर खिलौना बेचने में लगाना शुरु कर दिया. काफ़ी लोग इसे Frisbee कहते थे. इसलिए तब से इसका यही नाम पड़ गया.

6. सेनेटरी नैपकिन

महिलाओं द्वारा पी​रियड्स में इस्तेमाल होने वाला सैनिटरी नैपकिन असल में पहले विश्व युद्ध के दौरान घायल सैनिकों की ड्रेसिंग के लिए बनाया गया था. ये तेज़ी से खून सोखता था. जिन नर्सों की ड्यूटी वहां सैनिकों की मलहम-पट्टी के लिए लगी थी, उन्हें मैन्सट्रुअल ब्लड रोकने के लिए इससे सस्ता और आसानी से इस्तेमाल होने वाला प्रोडक्ट कोई नहीं लगा. विश्व युद्ध के बाद जब इस प्रोडक्ट की बिक्री घटने लगी, तो ‘Kotex’ ने सैनिटरी नैपकिन बाज़ार में उतारे.

7. Clay

हमने बचपन में हाथी, घोड़ा, घर और काफ़ी चीज़ें Clay से बनाई हैं. इसे 1930 में Noah McVicker ने बनाया था, ये कहते हुए कि ये वॉलपेपर क्लीनर के तौर पर काम आएगा. ये कोयले की भट्टियों में इस्तेमाल होता था. Clay छोटे-छोटे कणों को चिपका लेता था और वॉलपेपर साफ़ हो जाता था. बाद में जब भट्टियों से कोयला हटा, तो ये प्रोडक्ट भी बिकना बंद हो गया. लगभग बीस साल बाद McVicker के बेटे Joseph ने इस पर और काम किया और ये प्रोडक्ट स्कूलों में आर्ट एंड क्राफ़्ट में इस्तेमाल होने लगा.

8. इंटरनेट

 1960 के इस आविष्कार ने आज कई लोगों की रोज़ी-रोटी का इंतज़ाम ​कर दिया है. इसे United States Federal Government ने संचार को बेहतर करने के लिए और परमाणु हमले जैसी किसी आपदा में बेहतर कम्यूनिकेशन के लिए बनाया गया था. बाद में National Science Foundation ने ऐसा ही एक नेटवर्क बनाने का सोचा, जिससे सारी यूनिवर्सिटी आपस में जुड़ सके. बाद में प्राइवेट इंडस्ट्री ने इसे ग्लोबल नेटवर्क बना दिया, जिससे दुनियाभर के कम्प्यूटर जुड़ सकें.

9. वायग्रा

 आज ये दवाई कई मर्दों की इज़्ज़त बचाने के काम आती है. लेकिन सच बात तो ये है कि इसे हाई ब्लडप्रेशर, दिल की बीमारी और एनजाइना जैसे लक्षणों के लिए बनाया गया था. परीक्षण के दौरान पाया गया कि ये इन लक्षणों के लिए फायदेमंद नहीं है, लेकिन परीक्षण कर रहे पुरुषों ने इसका दूसरा असर देखा. वो उत्तेजित होने लगे और उनका लिंग सख्त होने लगा. सालों बाद वायग्रा पेनाइल डिसफंक्शन की दवाई बन कर बाज़ार में छा गई.