'यार बहुत हुआ, मैं Resign डाल रहा हूं.'

'बॉस बेमतलब सुनाता है, मन कर रहा है आज ही पेपर डाल दूं!'
'EMI का दबाव न होता, तो कब का नौकरी छोड़ दी होती.'

दोस्तों को ऐसी बातें करते सुना ही होगा. ये भी हो सकता है कि आपने ख़ुद ये सब कहा हो पर इस विचार को अमल में लाने के लिए कुछ ज़्यादा ही बेफ़िक्री की ज़रूरत होती है, जो हर किसी में नहीं होती. अपने पैरों पर खड़े होने वाला एहसास होता ही ऐसा है, जो आसानी से छोड़ा नहीं जा सकता. ऊपर से अगर बचत के नाम पर बैंक अकाउंट में सिर्फ़ चिल्लर है तो नौकरी छोड़ने का विचार अमल में लाना और नामुमकिन हो जाता है.

पर एक शख़्स ऐसा है जिसने कंप्यूटर पर खट-खट, रोज़मर्रा की बोरिंग ऑफ़िस लाइफ़ और बॉस की किच-किच से तंग आकर नौकरी को टाटा-बाय बाय कह दिया. Humans of Bombay ने शेयर की है एक ऐसे ही ऑटोवाले की कहानी.

'पिछले साल तक मेरे पास एक कायदे की डेस्क जॉब थी लेकिन रोज़ मैं उसी बोरिंग रूटीन को फ़ॉलो करता था. सुबह जल्दी उठो, काम पर भागो, पूरे दिन कंप्यूटर को घूरते रहो, बॉस की सुनो और फिर घर वापस आ जाओ. घर आते-आते कुछ और करने का वक़्त ही नहीं मिलता था, सिवाए सोने के. मुझे छुट्टी नहीं मिलती थी, जिस वजह से मैं अपने बच्चों को सिर्फ़ सोते हुए देखता था. धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि मैं 'जी' नहीं रहा हूं और मैं अपनी ज़िन्दगी के सबसे बेहतरीन पल गंवा रहा हूं, वो भी कुछ ऐसी चीज़ के लिए जिसे करना मुझे पसंद भी नहीं था. इस ख़्याल के आते ही मैंने नौकरी छोड़ दी और अब मैं ऑटोरिक्शा चलाता हूं. अब मैं अपना बॉस हूं, मेरे काम करने के घंटे भी मेरी मर्ज़ी के हैं और अब मैं अपने बच्चों को बड़ा होते देख सकता हूं... सालों बाद मैं इतना ख़ुश हूं.'

इस जिगर वाले ऑटोरिक्शा ड्राइवर की कहानी पर लोगों की प्रतिक्रिया:

अगर काफ़ी समय से नौकरी छोड़ कुछ अपना शुरू करने का इरादा बना रहे हो, तो अब उस इरादे को पक्का कर लो. याद रखो, 8 घंटे की नौकरी के बाहर भी एक ज़िन्दगी है.