देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 5192 तक पहुंच गई है. इस महामारी का और विस्तार न हो इसलिए हेल्थ केयर सेक्टर के लोग दिन-रात काम कर रहे हैं. डॉक्डर्स, नर्स, केमिस्ट के अलावा भी कई लोग ऐसे हैं जो कोरोना के ख़िलाफ जारी इस जंग में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. मगर इनके बारे में बहुत कम लोग ही बात करते हैं.

ये है किसी हॉस्पिटल का हाउस कीपिंग स्टाफ़. ये लोग भी किसी कोरोना फ़ाइटर से कम नहीं हैं. ये अपनी जान जोखिम में डाल कर अस्पताल से रोज़ाना निकल रहे Biomedical Waste को बाहर ले जाने और उसे सही तरीके से नष्ट करने का काम कर रहे हैं. कोरोना के मरीज़ों के इलाज़ में इस तरह का कचरा रोज़ प्रोड्यूस हो रहा है.

biomedical waste
Source: dumpsters

इसे अगर समय-समय पर बाहर नहीं फेंका जाएगा तो इससे दूसरे लोगों को भी संक्रमित होने का ख़तरा रहता है. ऐसे ही एक कोरोना फ़ाइटर हैं संजय देहुरी, जो भुवनेश्वर एम्स में बतौर हाउस कीपिंग स्टाफ़ काम करते हैं. ये इस हॉस्पिटल के एक मात्र ऐसे वर्कर हैं जो इस काम को कर रहे हैं. असल में इस कचरे से होने वाले संभावित ख़तरे को जानकर बहुत से लोग ये काम करने से कतरा रहे थे.

मगर संजय ने साहस दिखाया और इस काम की ज़िम्मेदारी ली. वो अकेले इस कचरे को कलेक्ट करते हैं और उसे नष्ट भी करते हैं. एक ट्विटर यूज़र ने उनके हौसले को सलाम करते हुए उनकी कुछ तस्वीरें शेयर की हैं. इस पोस्ट को हज़ारों लोग लाइक कर चुके हैं, साथ ही संजय के समर्पण और जज़्बे को सलाम कर रहे हैं:

इस महामारी से हमें बचाने में जुटे ऐसे ही दूसरे कोरोना फ़ाइटर्स के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है. इनके बिना इस जंग को जीतना हमारे लिए बहुत कठिन हो जाएगा.


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