हमारे समाज में जाति व्यवस्था ने इतनी पैठ बना रखी है कि आज भी कुछ लोगों के साथ उनकी जाति के चलते दुर्व्यवहार करने की घटनाएं सामने आती रहती हैं. समाज की इसी जातिवादी सोच को ख़त्म करने का काम कर रहा है बंगाल का एक स्कूल, जहां पर एक आदिवासी लड़की को सरस्वती पूजा के लिए पुजारी बनाया गया है.

ये स्कूल पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले में स्थित है. इसका नाम है Dalla Chandramohan High School. यहां पढ़ने वाली 11वीं की छात्रा Rohila Hembram को आगामी सरस्वती पूजा के कार्यक्रम के लिए पुजारी बनाया गया है.

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पूजा एक आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं. इस पूजा में उनकी मदद एक अन्य शिक्षक बिनय बिस्वास करेंगे. इस स्कूल के प्रिंसिपल जॉयदेब लाहिरी ने बताया कि उनके स्कूल में बच्चों को समाज की जातिवादी सोच से मुक्त कराने के लिए काफ़ी लंबे अरसे से ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं.

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उन्होंने इंडिया टूडे से बात करते हुए कहा- 'कुछ साल पहले जब मैं इस स्कूल का हेड मास्टर था, तब एक पुजारी को पूजा के लिए बुलाया गया था, लेकिन उनकी कई आपत्तिजनक मांग थीं, जिसके बाद मैंने ख़ुद 1 रुपया लेकर सरस्वती पूजा करने का निर्णय लिया था. तब से लेकर अब तक हर साल इस परंपरा को जारी रखा जा रहा है. इसमें गैर-ब्राह्मण समुदाय के लोगों को पूजा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.'

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वहीं Rohila ने कहा कि वो इस बात से ख़ुश हैं कि उन्हें इस कार्य के लिए चुना गया है. इस पूजा को सम्पन्न करने के लिए प्रिंसिपल और एक अन्य टीचर उनकी मदद कर रहे हैं.

इसे हमें एक नई शुरुआत के रूप में लेना चाहिए, क्योंकि इस स्कूल जैसे छोटे-छोटे कदमों से ही समाज में बड़ा बदलाव आएगा. है कि नहीं?


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