दीपावली सिर्फ़ ख़ुशियों और रोशनी का ही नहीं, बल्कि परंपराओं का त्योहार भी है. भारत के हर राज्य, धर्म और समुदाय में अलग-अलग परंपराओं के तहत दीपावली मनाई जाती है. हमारे देश की यही परम्पराएं हमें एकजुट करने का काम भी करती हैं. दीपावली को सेलिब्रेट करने का हर किसी का अपना-अपना तरीका हैं. कोई पटाखे जलाकर तो कोई दीये जलाकर दीपावली को सेलेब्रेट करता है.

लेकिन देश के इन 7 राज्यों या फिर समुदायों के लोग दीपावली को अनोखे ही ढंग से मनाते हैं.

1- कलम-दवात की पूजा

कायस्थ समाज में दिवाली के मौके पर कलम-दवात को लक्ष्मी-गणेश के सामने रखकर पूजा की जाती है. इसके साथ एक कागज पर कम से कम 11 बार 'ऊं यमाय धर्मराजाय श्री चित्रगुप्ताय वै नमः' लिख कर इसे एक साल के लिए सुरक्षित रख दिया जाता है और बीते साल का कागज जल में प्रवाहित किया जाता है.

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2- मनाते हैं 'बंदी छोड़ दिवस'

सिख धर्म के लोग दिवाली को 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में मनाते हैं. इस ख़ास दिन गुरु अर्जुन देव के पुत्र गुरु हरगोविंद ने आपसी भाईचारे का परिचय देते हुए 52 हिंदू राजाओं को क़ैद से आजाद कराया था. उन्हीं की याद में सिख समाज के लोग दिवाली को 'बंदी छोड़ दिवस' के तौर पर मनाते हैं.

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3- रात भर होती है काली पूजन

बंगाल में बंगीय समाज के लोग दिवाली के मौके पर महाकाली की पूजा करते हैं. इस दिन दीपमाला सजाने या आतिशबाजी की परंपरा नहीं है. जिस जगह दुर्गोत्सव का आयोजन हुआ हो, वहां बाकायदा प्रतिमा स्थापित कर महाकाली का पूजन किया जाता है. काली मां को गन्ना, कूष्मांडा और केले की सांकेतिक बली दी जाती है. महाभोग में खिचड़ी, खीर, पनीर, गोभी आदि की सब्जियां अर्पित की जाती हैं.

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4- महावीर स्वामी को चढ़ता है लाडू

जैन धर्म में दिवाली के मौके पर खासतौर से महावीर स्वामी की पूजा की जाती है. क्योंकि जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी का मोक्ष निर्वाण कार्तिक अमावस्या पर हुआ था. मोक्ष निर्वाण पूजन के लिए जैन समाज के लोग जैन मंदिरों में सुबह से जुटने लगते हैं. महावीर स्वामी को 24 किलो का लाडू चढ़ाया जाता है.

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5- बहीखाता पूजन की परंपरा

दिवाली के मौके पर अग्रवाल समाज के लोग लक्ष्मी-गणेश -साथ बहीखाते की पूजा भी करते हैं. दिवाली पर नए बहीखाते का पूजन कर भाई दूज से इसका प्रयोग शुरू किया जाता है। धनतेरस पर लक्ष्मी-गणेश और हनुमान जी की प्रतिमाएं खरीदी जाती हैं और भगवान धन्वंतरि का भी पूजन होता है। बड़ी दिवाली पर नए बहीखाते पर ‘श्री गणेशाय नम:’ लिखा जाता है.

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6- 'ऐपण' बनाने की परंपरा

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में दिवाली के मौके पर पिसे हुए चावल के पेस्ट से ज़मीन पर रंगोली बनाई जाती है. इसे 'ऐपण' कहते हैं. इस दिन शाम को बड़ा दीपक रोशन किया जाता है. फिर लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है इसके बाद ही दिवाली मनाई जाती है.

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7- गाय-बछड़े की पूजा

मराठी समाज में दिवाली के मौके पर गाय-बछड़े की पूजा की जाती है. इस दिन माताएं अपने बच्चों की समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं. छोटी दिवाली पर सूर्योदय से पहले लोग उबटन लगाकर सूर्योदय से पहले स्नान करते हैं. इसके साथ दीप रौशन कर आतिशबाजी का भी चलन है.

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