‘ज़िन्दगी में आगे बढ़ने का सिर्फ एक मूल मंत्र है- रिस्क.’ रिस्क ले कर ही आप नए अवसरों को तलाश सकते हैं. रिस्क से दूर रह कर आप सुरक्षित तो रह सकते हैं, पर दुनिया की भीड़ में पिछड़ सकते हैं. ऐसे में आपके दिल में होने वाली बेचैनी इस बात का संकेत है कि आप एक बदलाव की तरफ़ जा रहे हैं.

इसी बात को हम ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब आप आराम से रहेंगे, तो आपकी लाइफ़ की गाड़ी भी बिना किसी अवसर के एक ही पथ पर चलेगी. पर जैसे ही बेचैनियां आपकी ज़िन्दगी में आयेंगी, तो आपको ये देखना है कि ये किस ओर आपको लेकर जाती हैं. आज हम कुछ ऐसी ही फीलिंग्स के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि आप अब पुराने रास्तों को छोड़ कर नई मंजिल की तरफ बढ़ रहे हैं.

खुद का दिशाहीन लगना

जब आप इस उलझन में पड़ जायें कि ‘कौन-सा रास्ता सही है और कौन-सा गलत,’ आप ये महसूस करने लगें कि आप कहीं खो गये हैं और आपको खुद को तलाशने की ज़रूरत है. ये ज़िन्दगी का एक ऐसा पड़ाव है, जहां ज़िन्दगी आपसे सभी मुश्किल सवाल करती है.

कंधों पर ज़िम्मेदारियों का बोझ लगना

जब आप अपनी ज़िम्मेदारियों के प्रति सचेत हो जायें और आपको लगने लग जाये कि अब आपको अपनी ज़िन्दगी खुद संभालनी है. आप अपने सपनों को सच करने के बारे में सोचने लगें, तो समझ लीजिये कि बड़े फैसले लेने का वक़्त आ गया है.

संभावित असफलताओं का डर

अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास होने के बाद आपके अंदर संदेह उठने लगे कि कहीं आप अपने सपनों को पूरा करने के लिए कोई रिस्क, तो नहीं ले रहे. संदेह की इस लड़ाई में आप कोई फैसला लेने में असमर्थ रहते हैं और दिल की बात नहीं सुन पाते.

बदलाव का डर

असफ़लताओं के डर की वजह से आप एकदम से होने वाले बदलाव से भी डरने लगते हैं, जो हर दिन किसी न किसी रूप में आपके सामने आती रहती हैं. आप ये भी नहीं सोच पाते कि इतने सारे बदलावों को आप कैसे संभालेंगे?

समय का अचानक से जल्दी आना

जब तक आप ये समझ पाते हैं कि क्या कराना है और क्या नहीं कराना है. तब तक समय घंटे, दिन हफ़्ते और महीनों के रूप में आपके हाथों से फिसलने लगता है और आप अपने लक्ष्य के करीब नहीं पहुंच पाते.

ज़िन्दगी की इस गति से थका हुआ महसूस होना

हर दिन पहले से ज़्यादा होता व्यस्त समय फीकी पड़ती ज़िन्दगी और आने वाली छुट्टियों का इंतज़ार. आपको ये महसूस कराते हैं कि आप इस सब से अब थक चुके हैं.

नकारात्मक चीज़ों के प्रति असहिष्णु

आप उन लोगों के साथ रहना पसंद नहीं करते, जिनके कार्य या शब्द आपको नकारात्मक चीज़ों का अनुभव कराती है. आप इस तरह के लोगों के साथ दूरी बनाने लगते हैं क्योंकि इनका साथ होना आपको नीचे की तरफ धकेलता है.

आधुनिक सुविधाओं का बुरा लगाना

आप जब ये समझ न पाएं कि लोग जैसे हैं, वैसे ही क्यों नहीं बने रहना चाहते? आप को दिखावटी चीज़ों में कोई दिलचस्पी न रह जाये.

आपको समाज के नियम-कानून परेशान करने लग जायें

आपके नज़रिए से जब समाज के नियम कानून आपके आगे बढ़ने में रुकावट पैदा करने लगें. आप महसूस करने लगे कि जितना ये लोग काम नहीं करते, उससे ज़्यादा परेशानियां खड़ी करते हैं. आप एक ऐसी दुनिया का सपना देखने लगे, जहां आप हर किसी को बराबर देखें.

दूसरों को पूरा देख कर आपको निराशा हो

वैसे तो आपको कई चीज़ों में कमी का आना महसूस होने लगाता है, पर सबसे ज़्यादा दुःख ये देख कर होता कि लोग अपने-आप में खुश हैं. उन्हें किसी की कोई चिंता ही नहीं है कि दुनिया में क्या कुछ चल रहा है?

दुनिया का महत्त्वहीन महसूस होना

जब आप खुद को बहुत छोटा समझने लगते हैं. पूरा होने के बावजूद आप किसी के लिए कोई मायने नहीं रखते. आपकी उपलब्धियों से किसी को कोई मतलब नहीं है.

आपकी दोस्ती उदासीन बन कर रह जाये

बिना इस बात की फ़िक्र किये कि आपके दोस्त कितने पुराने हैं या उनके साथ आप खुद को कैसा महसूस करते हैं. आप नए दोस्तों को तलाशने लगते हैं बेशक वो आपको पीछे की तरफ धकेले.

खुद के साथ अकेले समय बिताना

अपनी सारी चिंताओं और आज़ादी को भूल कर किसी एकांत जगह चले जाना, जहां आप खुद से बातें करना चाहते हों.

आप उन लोगों से डरने लगते हैं, जो नहीं चाहते कि आप बदलें

आप खुद के अंदर के बदलाव को देख सकते हैं और आप ये भी जानते हैं कि इसे रोकना अभी नामुमकिन है. पर आप उन लोगों से डरने लगते हैं, जो दोस्त, परिवार और साथियों के रूप में आपके पास होते हैं. ये लोग आपके बदलाव को देख कर नहीं समझ पाते कि आपको आखिर क्या हो गया है?

जब कुछ चीज़ों की कमी महसूस करने लगे

बदलाव की इस यात्रा के दौरान आप बहुत-सी चीज़ों को पीछे छोड़ने लगते हैं और उन्हें याद करने लगते हैं. आप चाहते हैं कि वो एक बार फिर आपके पास आयें, पर आपके चाहने के बावजूद आप उन्हें नहीं देख पाते.

आगे बढ़ने के लिए आप खतरों से डरते हैं

ये बात तो साफ़ है कि बिना रिस्क के आगे नहीं बढ़ा जा सकता, पर वो रिस्क किस रूप में आपके सामने आने वाले हैं. इस बात के डर का रिस्क ही आपको डराने लगता है.

अपनी आवाज़ को सुनने के लिए बेचैन होना

आप कुछ कहना चाहते हैं, पर ये नहीं जानते कि इसे कैसे कहना है? आप इस बात से डरने लगते हैं कि शायद आपकी बातों को लोग उस तरह से न लें, जिस तरह से आपने इन्हें कहा था.

अपने बीते कल पर आपको दुःख होता है

आप अब जहां हैं, वहां से अपने बीते कल को देख कर पछताने लगते हैं. आपको अपनी हरकत और उस बर्ताव पर दुःख होने लगता है, जो आपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ किया होता है.

Source: aconsciousrethink