सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट पर चार हज़ार से ज़्यादा लोगों ने चढ़ाई की है, आगे भी ये सिलसिला चलता रहेगा. एवरेस्ट के अलावा की कई ऊंची पर्वत चोटियां हैं. जिसे चुनौती समझ कई लोग उन पर फ़तह हासिल कर चुके हैं.

पर क्या वजह है कि कैलाश पर्वत पर आज तक कोई नहीं चढ़ पाया है. कैलाश की ऊंचाई दुनिया के दस बड़े ऊंचे पर्वत में भी नहीं होती, ये समुद्र स्तर से मात्र 6,638 मीटर ऊंचा है.

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इसकी दो वजहें बताई जाती हैं, पहली ये कि ये किस्से-कहानियों से जुड़ा हुआ है और दूसरा ज़्यादा तार्किक लगता है.

बोन, जैन, हिन्दू और बौद्ध धर्म की मान्यताओं द्वारा कैलाश पर्वत को पवित्र माना जाता है. न्गारी के गार्पोनों के अनुसार, वही मानव इस पर्वत पर चढ़ सकता है जिसने कभी कोई पाप न किया हो. उनके अनुसार ऐसा मानव बस आंख मूंदते ही एक पक्षी में परिवर्तित हो जाएगा और उड़ कर ऊपर पहुंच जाएगा.

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1926 में Hugh Ruttledge ने उत्तर की ओर से चढ़ाई करने का अध्ययन करने पर पाया था कि 6,000 मीटर के बाद आगे बढ़ना असंभव हो जाता है.

Colonel R. C. Wilson अपने सहायक Tseten के साथ दूसरी ओर से बहुत आगे बढ़ चुके थे, उनके सहायक ने उत्साहपूर्वक कहा, 'साहब, हम चढ़ सकते हैं'. Wilsion एक जगह लिखते हैं, 'जैसे ही मैने आगे बढ़ने का एक आसान रास्ता ढूंढा वैसी ही भारी बर्फ़बारी होने लगी और चढ़ाई असंभव हो गई.'

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वर्तमान में चीन सरकार ने कैलाश पर्वत पर पर्वतारोहण प्रतिबंधित कर दिया है. हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार 1980 में चीन सरकार ने पर्वतारोही Reinhold Messner को चढ़ाई करने के लिए आमंत्रित किया था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना झेलने के बाद सरकार पीछे हट गई.

Reinhold Messner ने कैलाश पर्वत के बारे में कहा, 'अगर हम इस पर्वत पर चढ़ाई करते हैं, तो इसका मतलब होगा हमने लोगों की आत्मा पर चढ़ाई कर दी. मैं सुझाव दूंगा कि उन्हें किसी मुश्किल पर्वत पर चढ़ाई करने की कोशिश करनी चाहिए, कैलाश बहुत ऊंचा और बहुत मुश्किल नहीं है.'