ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में भीषण आग लगी हुई हैं. लाखों जानवर अब-तक जल कर मर चुके हैं. हज़ारों लोगों का अपना घर छोड़ कर जाना पड़ा. ऐसी परिस्थिति में एक सिख महिला जो दस साल भारत में अपने घरवालों से मिलने आने जाने वाली थी, आखिरी वक़्त में वहां की लोगों को मदद करने के लिए रुकना बेहतर समझा.

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35 साल की सुखविंदर कौर 10 साल बाद ब्रेन स्ट्रॉक की वजह से कोमा में जा चुकी बहन को देखने अपने शहर जाने वाली थी. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के East Gippsland में लगी आग ने उसे उड़ान नहीं भरने दिया.

डेली मेल के रिपोर्ट के अनुसार, सुखविंदर कौर नए साल की शाम से ही Bairnsdale Ovale में विस्थापित हुए लोगों की मदद के लिए जुटी हैं, वह रोज़ाना लगभग हज़ार लोगों के लिए खाना बनाती हैं. उनके काम की शुरुआत पौ फटते ही हो जाती है और रात 11 बज़े तक चलता है.

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सुखविंदर ने कहा, 'मुझे एहसास हुआ कि सबसे पहले मेरी ज़िम्मेदारी समाज के प्रति है. जहां मैं लंबे अरसे से रह रही हूं. अगर मुसिबत के वक़्त मैं इन्हें छोड़ कर चली जाऊंगी तो शायद कभी ख़ुद को अच्छा इंसान नहीं कह पाऊंगी.'

सुखविंदर ने शुरुआत में 100 लोगों के लिए खाना बनाना शुरू किया था. धीरे-धीरें उनके पास आकर खाने वालों की तादाद बढ़ गई इसलिए वो 1000 लोगों के लिए खाना बनाने लगीं. वो इस काम के लिए अपने ऑफ़िस से भी छुट्टी ले रखी हैं.

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30 दिसंबर से ही सुखविंदर Bairnsdale Ovale के उस स्थान पर मदद के लिए पहुंच जाती थीं, जहां अधिकारियों ने विस्थापितों को रहने की व्यवस्था की थी. सुखविंदर ने भी अपने रहने की व्यवस्था वहीं कर ली, किचन में उनके साथ चार और लोग उनकी सहायता करते हैं और वो किचन के बगल में ही सो जाती हैं.

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया की जंगलों में लगी आग से 5 करोड़ से ज़्यादा जानवर मारे चुके ये आग 50 लाख हैक्टेयर में फैली हुई है.