Doda Barfi History: भारतीय मिठाइयां (Indian Desserts) अपने आप में अद्भुत होती हैं. न सिर्फ़ स्वाद में बल्कि इन्हें बनाने का अंदाज़ भी अलहदा होता है. किसी को तलने के बाद चाशनी में डुबोया जाता है तो किसी को कड़ाही में घंटों पकाया जाता है. इतनी सारी मेहनत के बाद दब मिठाई बनकर तैयार होती है तो लोग उसे खाकर तारीफ़ों के पुल बांधते नहीं थकते.  

आपकी भी कोई न कोई फ़ेवरेट मिठाई ज़रूर होगी. जैसे बहुत से लोगों की फ़ेवरेट मिठाई डोडा बर्फ़ी (Doda Barfi) होती है. इस बर्फ़ी की ख़ासियत ये है कि इसे बनाने में खोया यानी मावा का इस्तेमाल नहीं किया जाता. फेस्टिव सीज़न में हर जगह और हरियाणा-पंजाब में किसी भी ख़ुशी के मौक़े पर अधिकतर यही मिठाई मंगवाई जाती है.  

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इस स्पेशल मिठाई का इतिहास भी इसके जितना ही ख़ूबसूरत हैं. चलिए जानते है उस शख़्स के बारे में जिसने पहली बार डोडा बर्फ़ी बनाई और दुनिया को ये लजीज़ तोहफ़ा दिया.  

डोडा बर्फ़ी का इतिहास (Doda Barfi History)

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इस बर्फ़ी का इतिहास जानने के लिए हमें उस दौर में जाना होगा जब भारत हिंदुस्तान कहलाता था और इसके दो टुकड़े नहीं हुए थे. बात 1912 की अविभाजित भारत में एक पहलवान हुआ करते थे हंसराज विग. पंजाब के इस रेसलर को ताकत के लिए घी और दूध भारी मात्रा में खाना पड़ता था, ये इसे पसंद नहीं था और रोज़ाना यही खाकर ये उकता गए थे.  

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किचन में किया ख़ुद ही एक्सपेरिमेंट 

इसलिए उन्होंने घी और दूध का विकल्प तलाशने की कोशिश की. वो जुट गए रसोई में एक्सपेरिमेंट करने. यहां कड़ाही चढ़ा दी और इसमें उन्होंने दूध, घी, मलाई, चीनी और मेवा डालकर उसे घोंटना शुरू कर दिया. इसके बाद जो मिठाई बनकर तैयार हुई उसे ही पूरी दुनिया आज डोडा बर्फ़ी के नाम से जानती है. इसका स्वाद हरबंस को बहुत पसंद आया और वो इसे समय-समय पर बनाकर खाने लगे.  

स्वास्थ्य के लिए होती है बहुत लाभदायक  

आने वाले दिनों में वो इसे बेचने भी लगे. कुछ ही समय में ये पूरे देश के बच्चों और बड़ों की फ़ेवरेट चबाने वाले मिठाई बन गई. क्योंकि इसे खाने के लिए दांतों को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इस मिठाई को घर पर आसानी से बनाया जा सकता है और फ़्रिज में ये दो सप्ताह तक ताज़ी बनी रहती है. स्वाद में आला होने के साथ ही ये डोडा बर्फ़ी (Doda Barfi) स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है. उत्तर भारत में इस मिठाई को बड़े ही चाव से खाया जाता है.  

Royal Dodha House   

अब आप सोच रहे होंगे कि उन पहलवान जी का क्या हुआ जिन्होंने इसकी खोज की थी. ये बंटवारे के बाद भारत चले आए. विग परिवार सरघोडा ज़िले (अब पाकिस्तान) से पंजाब के कोटकपूरा में रहने लगे. यहीं उन्होंने Royal Dodha House की शुरुआत की. इनके परिवार का एक सदस्य पाकिस्तान भी चला गया जो वहां पर इस मिठाई की विरासत को बनाए हुए हैं.  

Homegrown

Royal Dodha House को अब उनके पोते विपिन विग संभालते हैं. यहां मिलने वाली डोडा बर्फ़ी का स्वाद आज भी वैसा ही जैसा सौ साल पहले था. ये पंजाब में मशहूर है और वहां के हर शहर में इसे डिलीवर किया जाता है. इन्होंने इस मिठाई को विदेशों में भी एक्सपोर्ट करना शुरू कर दिया है.  

अगर आपने अभी तक इस मिठाई का स्वाद नहीं चखा है तो मौक़ा मिलते ही टेस्ट करना.