LIC(Life Insurance Corporation Of India) भारत ही नहीं पूरी दुनिया की बेस्ट इंश्योरेंस कंपनियों में से एक है. एक दौर था जब भारत में बीमा का मतलब ही LIC हुआ करता था. मार्केट में नई-नई बीमा कंपनियों के आ जाने के बाद भी इसकी साख कम नहीं हुई है. LIC में 1.2 लाख कर्मचारी कार्य करते हैं और क़रीब 30 करोड़ बीमा पॉलिसियां इनके पास हैं. LIC का कुल बिज़नेस लगभग 6 लाख करोड़ रुपये है. 

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भारत में एलआईसी की शुरुआत कैसे हुई ये बहुत कम लोग जानते हैं. इसके बनने का क़िस्सा स्वदेशी आंदोलन से जुड़ा है. क्या है LIC का इतिहास चलिए आज आपको बताते हैं.

भारत में कब हुई बीमा कंपनी की शुरुआत?

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LIC का इतिहास जानने से पहले आपको जानना होगा कि भारत में बीमा कंपनियों का आगमन कब हुआ. भारत में पहली बीमा कंपनी साल 1818 में स्थापित हुई. इसका नाम था, ओरिएंटल लाइफ़ इंश्योरेंस(Oriental Life Insurance Company). कलकत्ता में इस कंपनी की शुरुआत हुई. ये कंपनी इंग्लैंड से इंडिया आई थी. उस दौर में भारत में बहुत सारी यूरोपियन कंपनियों ने यहां इंश्योरेंस करना शुरू कर दिया था.

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विदेशी कंपनियां भारतीयों से अधिक प्रीमियम वसूलती थीं

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मगर ये तब भी ब्रिटिश लोगों का ही बीमा करती थीं भारतीयों का नही. तब कुछ समझदार और रसूखदार भारतीय लोगों के विरोध जताने पर उन्होंने इंडियन्स का इंश्योरेंस करना शुरू कर दिया. यहां भी बीमा कंपनियों ने दोगलापन दिखाया. वो भारतीय लोगों को दोयम दर्जे का समझतीं और उनसे अधिक प्रीमियम वसूल करती थीं. 1823 में बॉम्बे लाइफ़ एश्योरेंस कंपनी की शुरुआत हुई, इसने भारतीयों का बीमा बहुत कम या फिर वाजिब दामों पर करना शुरू किया. 

स्वदेशी आंदोलन ने कई भारतीय बीमा कंपनियों की नींव रखी

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1905-1907 के बीच हुए स्वदेशी आंदोलन के दौरान बहुत ही भारतीय बीमा कंपनियां स्थापित हुई. 1940 के दशक देश में बहुत सारी इंश्योरेंस कंपनियां हो गई थीं. इनके बीच प्रतिस्पर्धा अधिक थी तो वो अनुचित व्यापार भी करने लगीं. इसलिए भारत सरकार इनका राष्ट्रीयकरण करने के बारे में सोचने लगी.

Life Insurance Corporation Of Indiaकब अस्तित्व में आई

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आज़ादी के बाद 19 जून 1956 को संसद ने लाइफ़ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन एक्ट(Life Insurance of India Act) पारित कर देश में काम कर रहीं सभी बीमा कंपनियों को टेकओवर कर लिया. उस वक़्त बीमा कंपनियों की संख्या लगभग 250 थी. इस तरह 1 सितंबर 1956 को LIC अस्तित्व में आई.   

उचित दर पर मिली लोगों को आर्थिक सुरक्षा

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एलआईसी की स्थापना देश के सभी नागरिकों को उचित दर पर आर्थिक सुरक्षा मुहैया करवाने के लिए की गई थी. ये अपने उद्देश्य में कामयाब भी रही. 1990 के दशक तक Life Insurance Corporation Of India ने खूब बीमे किए क्योंकि वो इस क्षेत्र की एकमात्र खिलाड़ी थी. इसने करोड़ों लोगों का बीमा कर एजेंट और कस्टमर सबको मुनाफा दिलवाया. ख़ुद भी करोड़ों का बिज़नेस किया. 1999 में मल्होत्रा समिति की सिफ़ारिश पर एलआईसी एक्ट में कई परिवर्तन हुए. 

आज भी मार्केट में है एलआईसी का दबदबा

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इसमें सबसे महत्वपूर्ण निजी क्षेत्र को बीमा कारोबार में प्रवेश की अनुमति दिया जाना था. इस तरह दूसरी भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण का गठन किया गया. मगर मार्केट में आज भी दबदबा LIC का ही है. आज भी 60 फ़ीसदी से अधिक बीमाधारक LIC के ही है. लोग इसका ही इंश्योरेंस ख़रीदने पर जोर देते हैं.