Raja Ravi Varma: केरल के किलिमनूर में जन्में (29 अप्रैल 1848) महान चित्रकार राजा रवि वर्मा जिन्हें आधुनिक भारतीय कला का जनक माना जाता है, उनका नाम कला के इतिहास में महानतम चित्रकारों में शुमार है. उन्होंने भारतीय संस्कृति, साहित्य, पौराणिक कथाओं और उनके पात्रों के जीवन पर चित्र बनाये हैं. 

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राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) के चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि वो सभी हिंदू महाकाव्यों और धर्म ग्रंथों से प्रभावित हैं, उनकी चित्रकारी की कला भारतीय परंपरा और यूरोपीय तकनीक के एकत्रीकरण (कंसोलिडेशन) का सबसे बेहतरीन उदाहरण है.

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आज के इस आर्टिकल में हम राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma Life Interesting Facts) की ज़िंदगी से जुड़े उन तथ्यों के बारे में जानेंगे, जो ही आपको पता हों.  

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Raja Ravi Varma

राजा रवि वर्मा के बारे में 10 बातें जो आपको जाननी चाहिए

1. विद्वानों के परिवार से थे रवि वर्मा 

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रवि वर्मा का जन्म विद्वानों, कवियों और कलाकारों के परिवार में हुआ था, उनकी मां के परिवार ने वंश और उत्तराधिकार की मातृवंशीय व्यवस्था (Matrilineal System) का पालन किया था. इसलिए, रवि वर्मा अपनी मां के परिवार के थे और उनके बच्चे उनकी मां के परिवार के थे. 

2. राजा अय्यिलम थिरुनल ने दी थी स्कॉलरशिप  

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जब रवि वर्मा एक छोटे लड़के थे, तब उनके चाचा ने उनकी चित्रकारिता की अद्भुत प्रतिभा को पहचाना और उन्हें तत्कालीन शासक राजा अय्यिलम थिरुनल के पास ले गए. राजा ने रवि वर्मा को चित्रकला की शिक्षा प्राप्त करने में मदद की और वर्मा को चित्रकला की वेस्टर्न स्टाइल से परिचित कराया. 

3. मवेलिककारा के राजघराने की लड़की से शादी की 

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18 साल की उम्र में रवि वर्मा ने मवेलिककारा के राजघराने की 12 साल की लड़की भागीरथी बाई से शादी की, दोनों के दो बेटे और तीन बेटियां थीं.  

4. कैसर-ए-हिंद गोल्ड मेडल से नवाज़ा गया  

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1904 में, ब्रिटिश सम्राट की ओर से वायसराय लॉर्ड कर्ज़न ने रवि वर्मा को ‘कैसर-ए-हिंद गोल्ड मेडल‘ से नवाज़ा था. इस पुरस्कार के लिए प्रशस्ति पत्र में उनके नाम के आगे पहली बार ‘राजा’ की उपाधि का उल्लेख किया गया है.  

5. छोटे से शहर पर खोलना पड़ा था डाकघर 

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राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) और उनके चित्रों की प्रसिद्धि इतनी बढ़ चुकी थी कि वर्मा के जन्म स्थान किलिमानूर जैसे छोटे से शहर पर एक डाकघर खोलना पड़ा था, क्योंकि देश के विभिन्न कोनों से उनके लिए चित्रों के लिए अनुरोध पत्र आने लगे थे.  

6. लिथोग्राफ़िक प्रिंटिंग प्रेस की शुरुआत की  

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राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) ने 1894 में एक लिथोग्राफ़िक प्रिंटिंग प्रेस शुरू की, जिसे बाद में जर्मनी के एक प्रिंटिंग टेक्नीशियन को बेच दिया. इस प्रेस से रवि वर्मा महाभारत, रामायण और पुराणों के देवी-देवताओं के चित्र छापते थे. 

7. द डायरी ऑफ़ सी राजा राजा वर्मा (The Diary of C. Raja Raja Verma)

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राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) के भाई, सी. राजा राजा वर्मा एक अच्छे लैंडस्केप कलाकार थे. राजा रवि वर्मा के जीवन के बारे में अधिकांश जानकारी उनके भाई द्वारा लिखी गई ‘द डायरी ऑफ़ सी. राजा राजा वर्मा’ के माध्यम से ही मिली है, जो राजा रवि वर्मा के असिस्टेंट और बिज़नेस मैनेजर थे.  

8. वड़ोदरा के महाराजा द्वारा चित्र बनाने के लिए किया नियुक्त  

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राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) को विशेष रूप से वड़ोदरा के महाराजा द्वारा शाही परिवार के चित्र और हिंदू पौराणिक कथाओं पर आधारित चित्र बनाने के लिए नियुक्त किया गया था. आज वड़ोदरा के लक्ष्मीविलास पैलेस स्थित म्यूज़ियम में राजा रवि वर्मा के चित्रों का बहुत बड़ा संग्रह है. 

9. शिकागो में दस चित्रों का प्रदर्शन किया 

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रवि वर्मा को 1893 में शिकागो में विश्व की कोलंबियाई प्रदर्शनी के निमंत्रण से सम्मानित किया गया था, जहां स्वामी विवेकानंद ने अपना प्रसिद्ध भाषण दिया था. राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) ने वहां अपने दस चित्रों का प्रदर्शन किया था. 

10. वियना प्रदर्शनी में जीत हासिल की  

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1873 में राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma) ने मद्रास पेंटिंग प्रदर्शनी में पहला पुरस्कार जीता. इसलिए 1873 में वियना प्रदर्शनी में जीत हासिल करने के बाद वे विश्व प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार बन गए.  

ये हैं महान चित्रकार राजा रवि वर्मा (Raja Ravi Varma Life Interesting Facts) के 10 तथ्य!