भारत का झारखंड राज्य अपनी आदिवासी संस्कृति और खनिज संपदा के लिए जाना जाता है. यहां दूर-दूर तक फैले घने वन यहां की जनजातियों के लिए जीवनदायिनी समान हैं. वहीं, इनसे अलग यह राज्य कई अनसुलझे रहस्यों का गढ़ भी माना जाता है. यहां मौजूद खंडहर और घने जंगलों के साथ-साथ यहां की नदियां भी अपने अंदर कई राज समेटे हुए हैं. इस ख़ास आर्टिकल में हमारे साथ जानिए झारखंड की एक ऐसी नदी के बारे में जो वर्षों से सोनो उगलने का काम कर रही है. पूरी जानकारी के लिए लेख को अंत तक ज़रूर पढ़ें.

Subarnarekha River
Source: telegraphindia

उगलती है सोना  

gold river
Source: dailysabah

ये नदी झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा में बहती है और इसका उद्गम झारखंड के रांची शहर से लगभग 16 किमी दूर है. जानकर आश्चर्य होगा कि नदी रहस्यमयी तरीके से सोना उगलने का काम करती है. यही वजह है इसका नाम स्वर्णरेखा पड़ा. यहां कई वर्षों से सोना निकाला जा रहा है. इस नदी से निकलने वाले रेत में सोने के कण पाए जाते हैं. इस वजह से यहां की आसपास की जनजातीयां यहां सोना निकालने का काम करती है.  

भू-वैज्ञानिकों के शोध का विषय 

Subarnarekha River satellite view
Source: wikimedia

अपनी इस ख़ास बात के लिए यह नदी भूवैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय रही है. यहां रिसर्च कर चुके कई भूवैज्ञानिकों का मानना है कि यह नदी चट्टानों से होकर आगे बढ़ती है और इस वजह से इसमें सोने के कण आ जाते हैं. हालांकि, इस बात में कितनी सच्चाई है इस बात का पता आज तक नहीं लग सका है.

सोने को लेकर अलग-अलग राय  

gold river
Source: blogspot

इस नदी से सोना निकलने की बात को लेकर अब तक कई अलग-अलग मत प्रस्तुत किए जा चुके हैं. जिनमें से एक यह है कि इस नदी की सहायक नदी ‘करकरी’ से इसमें सोने के कण आते हैं, क्योंकि ठीक ऐसे ही सोने के कण ‘करकरी’ नदी में भी पाए जाते हैं. हालांकि, इस तथ्य की भी पूरी तरह से पुष्टि नहीं की जा चुकी है.

gold river of jharkhand
Source: outlookindia

साथ ही इस सवाल का जवाब भी आज तक नहीं मिल पाया कि स्वर्णरेखा के साथ-साथ करकरी नदी में भी सोने के कण कहां से आते हैं? जानकारी के लिए बता दें कि सहायक नदी ‘करकरी’ की लंबाई 37 किमी है, जबकि स्वर्णरेखा की लंबाई 474 किमी है.  

आदिवासियों के लिए आय का स्रोत  

river of gold in india
Source: tripadvisor

सोना निकलने के रहस्य से अलग स्वर्णरेखा नदी यहां के आदिवासियों के लिए आजीविका का एक स्रोत है. यहां सुबह से शाम तक स्थानीय निवासी रेत को छानकर सोने के कण अलग करते नज़र आ जाएंगे. इस काम में न सिर्फ पुरुष, बल्कि पूरा परिवार लगा रहता है.  

धैर्य भरा काम है सोना निकालना  

river of gold medium
Source: medium

यहां की कुछ जनजातियां मुख्य रूप से इसी काम में लगी रहती हैं. खासकर, झारखंड का तमाड़ और सारंड क्षेत्र इसी काम के लिए जाना जाता है. यहां पीढ़ी दर पीढ़ी होता आया है. नदी से सोना निकालने का काम इन जनजातियों के जीवन का एक अंग बन चुका है. वहीं, स्थानीय जनजातियों को अनुसार इस काम में बहुत धैर्य की ज़रूरत होती है, क्योंकि कभी-कभी ऐसा भी होता है कि सुबह से शाम तक काम करने के बावजूद एक सोने का कण भी हाथ नहीं आता, लेकिन कभी-कभी किस्मत साथ दे देती है.

river of gold
Source: jagran

मानसून को छोड़कर साल भर चलता है काम   

gold in river
Source: gajreport

नदी से सोना निकालने का काम मानसून के महीनों को छोड़कर पूरे साल भर किया जाता है. मानसून के दौरान नदियों का बहाव तेज़ हो जाता है, इसलिए इस दौरान काम नहीं किया जाता.

कितनी मिलती है क़ीमत  

gold and river
Source: dailyhunt

नदी से निकाले गए सोने के कण बहुत ही छोटे होते हैं. एक इंसान एक महीने में लगभग 60 से 80 सोने के कण निकालने में सफ़ल हो जाता है. वहीं, कभी-कभी से संख्या घटकर 20-25 भी हो जाती है. माना जाता है कि नदी से निकाला गया सोने का एक कण 100 रुपए तक में बिक जाता है, लेकिन इसका बाज़ार भाव 300 से भी ज़्यादा बताया जाता है.  

river
Source: unsplash

इनके बीच काम करने वाले दलाल और लालची सुनारों की वजह से इन्हें अपनी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पाता. जानकारी के अभाव में यहां के भोले-भाले स्थानीय लोग बहुत की कम कीमत पर इन्हें स्थानीय सुनारों को बेच देते हैं. तो यह थी सोना उगलने वाली नदी की कहानी. आपको यह लेख कैसा लगा, हमें कमेंट में ज़रूर बताएं.