Made In India Footwear Brand: भारत में पिछले क़रीब 5 दशकों से कुछ फ़ुटवियर ब्रांड ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं. इनमें से कुछ तो ऐसे भी हैं जो 7 दशक से भी अधिक पुराने हैं. प्रतिस्पर्धा के चलते इनमें से कुछ फ़ुटवियर ब्रांड विलुप्त हो चुके हैं, लेकिन इनमें से कुछ ऐसे भी हैं जो नाइकी, एडिडास और प्यूमा जैसे इंटरनेशनल ब्रैंड्स को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. आज भी ये 'मेड इन इंडिया' ब्रैंड्स मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास के बीच काफ़ी प्रचलित हैं. समय के साथ बदलाव इनकी सफ़लता का एक प्रमुख कारण रहा है. आज ये फ़ुटवियर कंपनियां Men's, Women's और Kid's के हर तरह के शूज़ और चप्पल बना रहे हैं. पार्टी वेयर से लेकर स्पोर्ट्स सूज़ आज इनकी पहचान बन चुके हैं.

ये भी पढ़ें- वो 23 भारतीय ब्रांड्स जो कभी हमारे जीवन का हिस्सा थे, अफ़सोस अब हो गए हैं कहीं गुम

Made In India Footwear Brand
Source: linkedin

चलिए जानते हैं वो कौन-कौन से 'मेड इन इंडिया' फुटवियर ब्रांड जो ग्राहकों की पसंद बने हुए हैं-

1- Liberty

लिबर्टी (Liberty) देश का सबसे पुराना 'मेड इन इंडिया' फ़ुटवियर ब्रांड है. सन 1954 में हरियाणा के करनाल में 1 दिन में 4 जोड़े बनाने से इसकी शुरुआत हुई थी, लेकिन आज 'लिबर्टी' 1 दिन में 50,000 जोड़ी फ़ुटवियर का उत्पादन करती है. वर्तमान में इसका कारोबार 600 करोड़ रुपये से अधिक है. 'लिबर्टी' दुनिया में चमड़े के जूते के शीर्ष 5 निर्माताओं में से हैं. भारत समेत 25 से अधिक देशों में इसके ग्राहक हैं. आज 'लिबर्टी' के 6,000 मल्टी-ब्रांड आउटलेट और 350 शोरूम हैं, जिनमें भारत के बाहर 50 शोरूम हैं.

Liberty Footwear
Source: adgully

2- Action

एक्शन ग्रुप (Action Group) की शुरुआत 1972 में हुई थी. ये फ़ुटवियर पिछले कई दशकों से ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं. 90 के दशक में 'एक्शन शूज़' हर स्कूली बच्चे की पहली पसंद होते थे. आज भी देश के अधिकांश छोटे शहरों के स्कूली बच्चे एक्शन के जूते ही पहनना पसंद करते हैं. एक्शन ग्रुप आज स्पोर्ट्स शूज़ के अलावा स्टील, कैमिकल्स, रिटेल समेत कई अन्य क्षेत्रों में भी काम कर रहा है.

Action Footwear
Source: theprint

3- Paragon

पैरागॉन (Paragon) की शुरुआत 1975 में केरल में हुई थी. साल 1982 में केरल में लोकप्रिय ब्रांड बनने के बाद पैरागॉन ने अन्य राज्यों में भी प्रवेश किया. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसके कर्मचारी और वितरक हैं. पैरागॉन के पास इन-हाउस फ़ुटवियर डिज़ाइन टीम है, जो बाज़ार से प्रतिस्पर्धा करने के लिए नए डिज़ाइन और मॉडल बनाती है. पैरागॉन का प्रमुख उत्पाद रबर के जूते हैं, लेकिन इसके अलावा इनके पास फ़ुटवियर उत्पादों की एक लंबी सीरीज़ भी है.

Paragon Footwear
Source: socialsamosa

ये भी पढ़ें- वो 10 भारतीय ब्रांड्स जिन्होंने सालों से हिंदुस्तानियों के दिलों में कायम कर रखा है विश्वास 

4- Relaxo 

रिलैक्सो (Relaxo) कंपनी की शुरुआत 1976 में दुआ बंधुओं ने की थी. ये आज भारत की सबसे लोकप्रिय फ़ुटवियर कंपनियों में से एक है. रिलैक्सो का मुख्यालय दिल्ली में है और इनकी 8 निर्माण इकाइयां हैं. ये फुटवियर कंपनी प्रतिदिन 6 लाख से अधिक जोड़ी फ़ुटवियर का उत्पादन करता है. रिलैक्सो फुटवियर की रेंज में आराम, स्टाइल और गुणवत्तापूर्ण कारीगरी का बेहतरीन संयोजन देखने को मिलता है.

Relaxo Footwear
Source: medianews4u

5- Red Chief 

रेड चीफ़ (Red Chief) भारत में तेज़ी से बढ़ता फ़ुटवियर ब्रांड है. इसकी शुरुआत 1997 में कानपुर में हुई थी. क़रीब 25 सालों में इसने युवाओं से लेकर बुज़ुर्गों को अपना मुरीद बना लिया है. आज भारत में मिडिल क्लास के लिए 'रेड चीफ़' पसंदीदा और मज़बूत ब्रांड बन गया है. देश के 16 राज्यों में इसके 175 एक्स्क्लिसिव आउटलेट्स और 3,000 मल्टीब्रैंड आउटलेट्स हैं. रेड चीफ़ केवल जूते और चप्पल ही नहीं, बल्कि चमड़े के कई अन्य उत्पादों की बिक्री भी कर रहा है. आज इसका टर्नओवर 324 करोड़ रुपये से अधिक है.

Red Chief Footwear
Source: kennokyos

6- Lakhani

लखानी ग्रुप (Lakhani Group) की शुरुआत सन 1966 में हुई थी, लेकिन इस ग्रुप ने फ़ुटवियर मैनुफैक्चरिंग सन 2000 में शुरू की थी. आज लखानी भारत में Beach Slippers के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है. इसके अलावा ये प्रति वर्ष 555 मिलियन जोड़ी जूते बनाने वाले देश के सबसे बड़े स्पोर्ट्स सूज़ निर्माता में से एक है. ये ग्रुप पिछले 21 सालों से देश में स्पोर्ट्स शूज़ बनाने वाला अग्रणी ब्रांड है. 'लखानी' समूह ने 'एडिडास' के साथ Tie-up भी किया है. लखानी के फरीदाबाद (हरियाणा), धार (एमपी), हरिद्वार (उत्तरांचल) और नोएडा (उत्तर प्रदेश) में मैनुफैक्चरिंग प्लांट हैं.

Lakhani Footwear
Source: feiautumn

इनमें से आपका फ़ेवरेट फ़ुटवेयर ब्रांड कौन सा है?

ये भी पढ़ें- 90s के ये 13 ब्रांड्स कभी हर भारतीय की ज़िंदगी का हिस्सा थे, मगर आज बाज़ार में ढूंढना मुश्किल है