भारत में 90s का वक़्त बदलाव का दौरा था. अर्थव्यवस्था के साथ-साथ लोगों की सोच भी बदल रही थी. तब लोग ज़रूरत से ज़्यादा शौक को तरजीह दे रहे थे. ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि देश में मिडिल क्लास तेज़ी से उभर रहा था. 

इस मौके का फ़ायदा बहुत से ब्रांड्स ने उठाया. उनमें से बहुतों ने तो एक पूरे दशक तक राज किया. एक तरह से ये ब्रांड्स आम आदमी की लाइफ़ का हिस्सा बन गए. हालांकि, बाद में ये ब्रांड्स या तो फेल हो गए या फिर धीरे-धीरे इनका बाज़ार सिमटता चला गया. बावजूद इसके इन ब्रांड्स ने भारतीयों के ज़हन में एक कभी न मिटने वाली छाप छोड़ी है.

आज हम कुछ ऐसे खुदरा ब्रांड्स का ज़िक्र करेंगे, जो कभी भारतीय बाज़ार पर राज करते थे. 

1. बिनाका टूथपेस्ट

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‘बिनाका’ एक ओरल हाइजीन ब्रांड था. इसने अपना टूथपेस्ट 1952 में रैकिट बेंकाइज़र (एफ़एमसीजी की दुनिया का एक बड़ा नाम) के द्वारा लॉन्च करवाया था. माना जाता है कि 70 के दशक में ‘बिनाका टूथपेस्ट’ ने काफी लोकप्रियता हासिल कर ली थी. ‘बिनाका’ एक ऐसा ब्रांड बना जिसने रेडियो के ज़रिए अपना एक अलग मुक़ाम बनाया था. ‘बिनाका गीतमाला’ बिनाका द्वारा प्रायोजित साप्ताहिक कार्यक्रम था, जिसमें फ़िल्मी संगीतों को जगह दी गई थी. साल 1996 में डाबर कंपनी ने इस ब्रांड को ख़रीद लिया. हालांकि, इसके बाद ये ब्रांड ज़्यादा दिन नहीं चल पाया और बाज़ार से ग़ायब हो गया. 

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2. गोल्ड स्पॉट

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गोल्ड स्पॉट भारत में काफ़ी लोकप्रिय हुआ था. ये ऑरेंज ड्रिंक सभी उम्र के लोगों की पहली पसंद बन गई थी. हालांकि, 1990 के दशक की शुरुआत में कोको-कोला ने इसे ख़रीद लिया. उसके बाद ये बाज़ार से कब ग़ायब हुई, किसी को भनक तक नहीं लगी. 

3. HMT

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HMT (हिंदुस्तान मशीन टूल्स) केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी है. एक वक़्त था, जब ये घड़ी हर भारतीय को समय बताती थी. मगर बदलते समय ने ख़ुद इस ब्रांड का ख़राब वक़्त ला दिया. बाज़ार में जैसे-जैसे नई टेक्नोलॉजी की घड़ियां आती गईं, वैसे-वैसे HMT का मार्केट देश से सिमटता चला गया.

4. पान पराग

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पान पराग एक प्रतिष्ठित ब्रांड है जो पान मसाला बेचता है. एक ज़माने में पान-मसाला खाने वाले ज़्यादातर लोगों के मुंह में ये गुटखा और ज़ुबान पर इस ब्रांड का नाम रहता था. छोटे पाउच में पान-मसाला बेचने की शुरुआत इसी ब्रांड ने की थी. आज तो हर तरफ़ दूसरे ब्रांड्स के ऐसे ही पाउच मिलते हैं. मगर शायद ही कोई आज पान पराग खाता है.

5. चारमीनार सिगरेट

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चारमीनार सिगरेट एक समय काफ़ी लोकप्रिय थी. अपनी दमदार टैगलाइन और आकर्षक पैकेजिंग के कारण इसने जल्द ही लोगों के बीच जगह बना ली थी. हालांकि, बाद में सरकारी नियमों और सिगरेट के विज्ञापनों पर रोक के बाद धीरे-धीरे ये ब्रांड सिमटता चला गया. 

6. डाबर आमला

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डाबर ब्रांड 1880 के दशक के अंत में शुरू हुआ था. आज भी ये ज़्यादातर भारतीयों का भरोसेमंद ब्रांड है. वहीं, डाबर आंवला हेयर ऑयल को 1940 के दशक में लॉन्च किया गया था. तब से लेकर आज भी ये भारतीय घरों में देखा जा सकता है. हालांकि, अब इसका पहले जितना बड़ा मार्केट नहीं रहा है. 

7. निरमा

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रंगीन कपड़ा भी खिल-खिल जाए… वाकई में एक समय हेमा, रेखा, जया और सुषमा सबकी पसंद निरमा वाशिंग पाउडर ही था. इसने कई मल्टी नेशनल कंपनियों को कड़ी टक्कर दी. इसका कारण था कि ये सस्ता और अच्छा डिटर्जेंट था जो निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों में जगह बनाने में कामयाब हो पाया. लेकिन, हाल के दिनों में, निरमा ने अपना आकर्षण काफी हद तक खो दिया है और केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ही इसका ठीक-ठाक बाज़ार रह गया है. 

8. पोप्पिंस

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सतरंगी पोप्पिंस छोटी कैंडीज़ थीं, जो पेपर पैकेजिंग में अच्छी तरह लपेटी जाती थीं. Poppins, Parle के स्वामित्व वाला एक ब्रांड है, जिसे 1950 में लॉन्च किया गया था. 90s का शायद ही ऐसा कोई बच्चा होगा, जिसने ये नहीं खाई होगी. हालांकि, आज इसका मार्केट काफ़ी कम हो गया है. वैसे कभी आपको ये दिखे तो एक बार खाकर ज़रूर देखिएगा. 

9. डालडा

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डालडा 1930 के दशक में पेश किया गया एक ब्रांड है जो वनस्पति घी बेचता था. ये दक्षिण एशिया में व्यापक रूप से लोकप्रिय था और भारत इसके आकर्षक बाजारों में से एक है. आपने भी अपने घर में ये टीन का पीला डिब्बा ज़रूर देखा होगा. बाद में यही प्लास्टिक के डिब्बे में आने लगा. वाकई में डालडा, वनस्पति घी का पर्याय बन गया था. ये भारत में सबसे लंबे समय तक चलने वाले ब्रांड्स में से एक है.

10. उषा

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उषा एक ऐसा ब्रांड है जो सिलाई मशीन, आयरन बॉक्स, कुकर, पंखे आदि जैसे कई सामान बनाता है. 1940 में अपने लॉन्च के बाद से ही इस ब्रांड ने ग्राहकों के लिए कई किफ़ायती और टिकाऊ सामान बनाए. आज भले ही इसका बहुत बड़ा बाज़ार न हो, लेकिन अभी भी लोग इस ब्रांड की तारीफ़ करते हैं. 

11. ऑलविन

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हैदराबाद के इस ब्रांड को 1942 में लॉन्च किया गया था. ये ऐसा ब्रांड है जो फ्रिज, स्कूटर, कलाई घड़ी जैसे सामान बनाता था. इसने क़रीब दो दशक तक भारतीय बाज़ार पर राज किया. मगर 90s का दौर ख़त्म होते ही इसकी चमक फीकी पड़ गई. हालांकि, इसे आज भी इसके ऊर्जा-कुशल रेफ्रिजरेटर के लिए याद किया जाता है.

12. बाटा

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बाटा एक शू कंपनी है जिसकी स्थापना 1884 में हुई थी. लेकिन भारत में ये 1931 में आई. भारतीयों के बीच ये ब्रांड काफ़ी सफ़ल रहा. ये जो 999 और 199 रुपये Only/- वाला मनोवैज्ञानिक खेल है, वो बाटा की ही देन है. आज भी ये ब्रांड मार्केट में है. वो बात अलग है कि आज बहुत से ब्रांड्स ने बाटा को पीछे छोड़ दिया है. 

13. कैडबरी जेम्स

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Cadbury Gems छोटे बटन के आकार की होती है. बाहर से रंगीन अंंदर से चॉकलेटी. ये 1960 के दशक से बच्चों की पसंदीदा चॉकलेट थी और कैडबरी जेम्स के विज्ञापन भी लोगों को काफ़ी पसंद आते थे. ज़्यादातर ब्रांड्स की तरह ये भी बाज़ार में तो है, मगर पहले जितनी पॉपुलर नहीं है.

वैसे इन ब्रांड्स में आपका सबसे फ़ेवरेट कौन था? कमेंट्स में बताइए.