दुनिया का सबसे बड़ा महाकाव्य महाभारत है. इसे लोग कथा नहीं मानते. खुद इस काव्य में 'घटित' शब्द उपयोग में लाया गया है, जिसका मतलब होता है, 'जो हुआ है'. लेकिन इस काव्य को ले कर कई लोगों के मन में असमंजस है. कई लोग इसे बस कथा के तौर पर ही देखते हैं. अगर हम गौर करें, तो हमारे आस-पास कई ऐसे प्रमाण हैं, जो साबित करते हैं कि महाभारत एक सच्ची घटना है. इसके पात्र और जगहें सच हैं. ऐसे में इनके पात्रों के बारे में कई ऐसे तथ्य हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी ही नहीं, या जो है वो भी अधूरी है. इस महाकाव्य के बारे में अधूरी जानकारी ही हमें कई बार वाद-विवाद में पीछे ढकेल देती है. इसलिए ही हम कुछ जानकारियों से आपको अवगत कराते हैं, जिसके बाद आप किसी को भी सही तर्क के साथ जवाब दे पाएंगे.

1. द्रौपदी और पांडव

जैसा कि हम सब जानते हैं, द्रौपदी के पांच पति थे. इसका कारण भी माता कुंती के शब्दों से मिल जाता है. लेकिन जैसा की सनातम धर्म में माना जाता है कि सब कुछ जो हम एक जीवन में जीते हैं, पिछले जन्म के पाप या पुण्य, श्राप और वरदान का नतीजा होते हैं. ऐसा ही कुछ द्रौपदी के साथ हुआ था. पिछले जन्म में शादी न हो पाने के कारण द्रौपदी ने शिव जी की तपस्या की थी, जिससे खुश हो कर उन्होंने द्रौपदी को वरदान मांगने को कहा. उसने पति की मांग की और होने वाले पति के 5 गुण बताए. शिव जी ने वरदान पर हामीं भरी और अगले जन्म में मनचाहे पति के मिलने की बात कही, जो गुण द्रौपदी ने मांगे थे, वो किसी एक पुरूष में होना नामुमकिन था इसलिए उन्हें 5 गुणों के रूप में पांडव मिले.

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2. द्रौपदी का चीर हरण

जब चौपड़ के खेल में पांडव द्रौपदी को हार गए, तब दुर्योधन ने उसके चीर हरण का आदेश दुश्शासन को दिया. द्रौपदी को अपमानित होने से बचाने के लिए स्वयं भगवान कृष्ण आए थे. लेकिन ये अधूरी जानकारी है. असल में भगवान कृष्ण के अलावा दुर्वासा ऋषि ने भी अपने वस्त्र दे कर द्रौपदी की लाज बचाई थी. इसका प्रमाण हमें शिव पुराण में भी मिलता है.

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3. द्रौपदी की शर्त

खुद को पांच पति में बांटने पर द्रौपदी राजी तो हो गई थीं, लेकिन उनकी एक शर्त थी कि वो अपने पति के घर को किसी और महिला के साथ नहीं बाटेंगीं. पांचो पांडवों ने द्रौपदी के अलावा भी शादी की थीं. लेकिन उनकी दूसरी पत्नियां कभी भी इंद्रप्रस्थ नहीं आईं.

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4. द्रौपदी और कौमार्य

पांच पति की पत्नी द्रौपदी एक-एक साल एक-एक पति के साथ व्यतीत करती थीं. द्रौपदी को ये वरदान था कि वो जैसे ही दूसरे पति के पास जाती, फिर से कौमार्य हासिल कर लेतीं.

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5. युधिष्ठिर

युधिष्ठिर पांडु के प्रथम पुत्र थे, राजा पांडु सत्यवादी और ईमानदार राजा थे. जब कुंती ने उन्हें गर्भ धारण की बात बताई, तभी उन्होंने कुंती को बोल दिया था कि मेरा ये पुत्र सत्य की राह पर चलेगा.

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6. युधिष्ठिर और उनके हुनर

युधिष्ठिर सिर्फ़ राजनीति का ही ज्ञान नहीं रखते थे, उस दौर में उन्हें कई ऐसी भाषाओं का ज्ञान था, जो धरती पर किसी और मानव को नहीं था. साथ ही वो एक कुशल भाला चलाने वाले भी थे. कहा जाता है कि वो बड़े से बड़े पत्थर को अपने भाले से कागज़ की तरह काट सकते थे.

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7. युधिष्ठिर की पत्नियां

राजा युधिष्ठिर की दो पत्नियां थीं. द्रौपदी और देविका. दोनों पत्नियों से उन्हें दो पुत्र हुए. प्रतिविध्या और यायुध्या. यायुध्या महाभारत की लड़ाई में जिंदा बच गए थे. लेकिन उन्हें युधिष्ठिर के बाद राजा नहीं बनाया गया. क्योंकि इसके लिए द्रौपदी तैयार नहीं थी. इस कारण वो अपनी माता के राज्य शिवी के राजा बने.

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8. युधिष्ठिर और चौपड़ का खेल

चौपड़ के खेल में अपना सब कुछ हार जाने के बाद युधिष्ठिर को इतनी ठेस लगी थी कि उन्होंने इस खेल में निपुणता हासिल करने के लिए बृदश्वा ऋषि से शिक्षा ली. कहा जाता है कि इसके बाद युधिष्ठिर के इशारों पर चौपड़ के पासे नाचते थे और वो फिर कभी इस खेल में नहीं हारे.

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9. युधिष्ठिर और जातिवाद

दुनिया में सबसे पहले किसी ने जाति प्रथा को तोड़ा, तो वो युधिष्ठिर ही थे, जब उन्होंने अपने भाई की शादी राक्षसनी हिडिम्बा से करवाई. उनका मानना था कि जाति से बड़ा आचरण होता है.

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10. युधिष्ठिर और श्राप

कुंती ने कर्ण के बारे में अपने किसी भी पुत्र को नहीं बताया था. युद्ध के दौरान जब कर्ण का वध हुआ तब कुंती ने पांडवों के सामने इस राज़ को खोला. इसके बाद युधिष्ठिर ने अपनी मां और समस्त महिला समाज़ को ये श्राप दिया कि वो कभी भी कोई राज़ नहीं छिपा पाएंगी.

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महाभारत जैसे महाकाव्य के बारे में जितना लिखो उतना कम है. अभी कई सारी बातें हैं, जिनसे आप अंजान हैं, लेकिन हम आपसे वादा करते हैं कि आने वाले वक़्त में आपको महाभारत के बारे में कई और जानकारियां प्रदान करेंगे. बस आप हमसे जुड़े रहें.

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