दुनिया में हर दौर में ऐसा कुछ-न-कुछ होता है जिसे शासन-प्रसाशन आम जनता से छिपा कर रखता है. तो वहीं आम जनता उन निषिद्ध चीज़ों को देखने-जानने के लिए लालायित रहती है. अगर किसी ने पश्चिमी दुनिया का साहित्य पढ़ा हो तो उसे इस बात की जानकारी होगी कि डैन ब्राउन के ‘द विंची कोड’ में भी Illuminati और निषिद्ध चीज़ों की बात होती है.
इन सारी निषिद्ध चीज़ों के बीच हम आज सम्राट अशोक द्वारा स्थापित और अग्रेसित किए जाने वाले रहस्यमयी नवरत्नों से आपको रूबरू करा रहे हैं. ज्ञात हो कि सम्राट अशोक कलिंग युद्ध में होने वाली हिंसा और रक़्तपात से आजिज़ होकर युद्ध से सन्यास लेने की घोषणा के बाद बौद्ध धर्म की शरण में जा चुके थे. और सम्राट अशोक ने शासन-प्रशासन को बेहतरी से चलायमान रखने के लिए इन 9 रत्नों को स्थापित और अग्रेसित किया. बाद बाकी आप भी इनके बारे में जानिए...
विशेष नोट:- सम्राट अशोक द्वारा स्थापित ये सारे रत्न किताबें थी जिसमें शासन-प्रशासन संभालने वाली गूढ़ बातें थीं.

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पहली किताब में प्रोपेगैंडा और युद्ध के मनोविज्ञान के इर्द-गिर्द बुना गया था. इसमें इस बात को मजबूती से रखा गया था कि मास ओपिनियन का किस प्रकार निर्माण किया जाए. इस मामले मे गर दुनिया के मशहूर शख़्सियक मुंडी की मानें तो मास ओपिनियन का निर्माण करना व उन्हें बदलना सबसे बड़ी काबिलियत है जिसमें पूरी दुनिया पर राज करने की क्षमता है.

दूसरी किताब में शरीर विज्ञान को लेकर गूढ़ बातें कही गई थीं कि किस प्रकार एक शख़्स को सिर्फ़ छू कर ही मारा जा सकता है. इसे मृत्यु स्पर्श कहते हैं. इसमें इस बात का वर्णन था कि किस प्रकार लोगों की धमनियों को पलट कर उन्हें अचेत किया जा सकता है. ऐसा माना जाता है कि जूडो भी इसी कला का एक विस्तार है.

तीसरी किताब में बायोटेक्नोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी का जिक्र है. लोगों का ऐसा कहना है कि इस किताब में हैजा की बीमारी और उसके इलाज का ब्यौरा लिखा था.

चौथी किताब में सगुन और धातुओं के रूपांतरण का जिक्र था.

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पांचवी किताब में दुनियावी और गैर-दुनियावी या फिर कि आसमानी चीज़ों से संपर्क का जिक्र था. इससे इस बात का साफ़-साफ़ पता लगता है कि इस समय लोग एलियन्स में भी विश्वास किया करते थे और उनसे संपर्क की कोशिश किया करते थे.

छठी किताब में गुरुत्वाकर्षण का जिक्र है और साथ ही “वैमानिक शास्त्र” का भी ब्यौरा है. इसे विमान बनाने की प्रक्रिया कहा जा सकता है. जिसे हम आज यूएफओ कह कर पुकारते हैं.

सातवीं किताब में ब्रम्हांड और उसके उत्पत्ति के सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की गई थी. इसके साथ ही इसमें समय और काल के सफ़र का भी जिक्र है.

आठवीं किताब में प्रकाश का जिक्र है और उसकी रफ़्तार के भी चर्चे हैं कि प्रकाश को किस प्रकार काबू में किया जाए और उसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके.

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नौवीं और अंतिम किताब में समाज शास्त्र का जिक्र है- इसमें हमारे समाज के उत्थान और उसके पतन की भविष्यवाणी की भी बातें कही गईं थी.

अब हम इन सारी चीज़ों को चाहे जैसे भी देखें मगर ये सारी चीज़ें या बातें कभी मुख्यधारा का हिस्सा हुआ करती थीं, और लोग मज़े लेकर इन सारी गुत्थियों और विषयों पर बात किया करते थे.