जॉर्ज फ़्लॉयड की हत्या के बाद से ही अमेरिका के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं. देश के 40 राज्यों में कर्फ़्यू है. अमेरिका समेत पूरी दुनिया में रंगभेद एक गंभीर समस्या है. हर साल अमेरिका में कई लोग बस इस वजह से अरेस्ट या मारे जाते हैं कि वो अश्वेत हैं और उन पर अपराधी होने का शक़ पहले जाता है.

अमेरिका के साथ ही दुनियाभर के कई शहरों में #BlackLivesMatters और जॉर्ज फ़्लॉयड के लिए न्याय की मांग करते हुए प्रदर्शन जारी हैं.  

भारत के भी कई आम लोगों और सेलेब्स ने जॉर्ज फ़्लॉयड पर लिखा. इसी के साथ ही देश में नस्लभेद, रंगभेद, जातिवाद आदि समस्याओं पर फिर से बहस हो रही है. हमारे देश के कुछ सेलेब्स की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी, फ़ेयरनेस क्रीम का विज्ञापन करने वाले कुछ सेलेब्स, रेसिज़्म की समस्या, जॉर्ज फ़्लॉयड पर अपनी बात रख रहे हैं. 

वहीं कुछ सेलेब्स ऐसे भी हैं जिन्होंने फरवरी में हुए दिल्ली दंग़ों पर चुप्पी साधे रखी पर अमेरिका में हो रहे विरोध का समर्थन कर रहे हैं

'हो कहीं भी आग पर ये आग जलनी चाहिए'
ये कहावत बहुत सटीक है लेकिन इस तरह का 'सेलेक्टिव विरोध' बहुत ख़तरनाक है. अपनी सहूलियत के हिसाब से, सेफ़ साइड लेते हुए किसी समस्या पर बोलना न सिर्फ़ समाज, गणतंत्र के लिए बेहद हानिकारक है. ज़्यादातर मौक़ों पर सेलेब्स ऐसा करते दिखाई देते हैं. विदेशों पर गला फाड़ने वाले सेलेब्स घर की समस्याओं पर अक़सर चुप्पी साधे नज़र आते हैं, आज अमेरिकी की समस्या पर मुखर सेलेब्स, देश की कई गंभीर समस्याओं पर मौन दिखे थे, जिनमें से एक है दिल्ली दंगे. 

जब जामिया के लाइब्रेरी में छात्र पिटे तो करण जौहर, करीना कपूर ख़ान, रणवीर शौरी मौन थे.

क्या इनके लिए ये समझना इतना मुश्किल है कि उनकी एक आवाज़ क्या कर सकती है? उनका देश की समस्याओं पर बोलना, उन्हें जानना कितना ज़रूरी है? 
अन्याय पर बोलना बेहद ज़रूरी है पर हर तरह के अन्याय पर बोलना ज़रूरी है.  

Source- Scoop Whoop

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