नेशनल रजिस्ट्री ऑफ़ सिटिज़नशिप(NRC) अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ रहा है. असम में 19 लाख लोग चिन्हित किये गए हैं, जो ग़ैरक़ानूनी तरीके से भारत में रह रहे हैं. अब महाराष्ट्र सरकार अवैध प्रवासियों के लिए डिटेंशन सेंटर बनाने वाली है. इसे नवी मुंबई के नेरुल में बनाया जाएगा.

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राज्य के गृह मंत्रालय ने नवी मुंबई की प्लानिंग अथॉरिटी सिडको(CIDCO) से डिटेंशन सेंटर के लिए नेरुल में तीन एकड़ ज़मीन मांगी है. केंद्र सरकार द्वारा जारी मॉडल डिटेंशन मैनुअल-2019 के अनुसार, जिस शहर या ज़िले में अवैध प्रवासियों की बड़ी संख्या होगी वहां डिटेंशन सेंटर होना चाहिए.

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भाजपा ने आम चुनाव 2019 में अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि वो देशभर में NRC लागू करेगी. महाराष्ट्र में अभी इसकी शुरुआत नहीं हुई है. हालांकि सत्ताधारी बीजेपी और उसकी सहयोगी शिवसेना इस मुद्दे पर एक मत हैं. पिछले रविवार को शिवसेना के सांसद और केंद्रीय उद्योग मंत्री अरविंद सावंत ने भी मुंबई में NRC लागू करने की मांग की है.

गृह विभाग ने अपनी ओर से महाराष्ट्र में रह रहे अवैध प्रवासियों की अनुमानित संख्या तो नहीं बताई, लेकिन एक अधिकारी ने मीडिया सूत्रों को बताया कि मुंबई में भारी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक रह रहे हैं. उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में वक़्त लगेगा इसलिए पहले से डिटेंशन सेंटर का होना ज़रूरी है. वर्तमान में अवैध प्रवासियों को जेल में रखा जाता है.

मुंबई का डिटेंशन सेंटर जेल जैसा नहीं होगा. यहां रखे जाने वालों को सभी ज़रूरी सुविधाएं मुहैया करायी जाएंगी. डिटेंशन में रखे गए परिवार एक दूसरे से अलग नहीं रखे जाएंगे. हर सेंटर पर बच्चों के लिए एक शिशु सदन भी बना होगा.