कोविड- 19 पैंडमिक की वजह से 2020 में कुछ भी नॉर्मल नहीं था. जहां कोरोना वायरस की वजह से कई लोगों ने ज़िन्दगी गंवाई तो लॉकडाउन की वजह से ज़िन्दगी पर ब्रेक लग गया. पैंडमिक और लॉकडाउन की वजह से अगर किसी की ज़िन्दगी पर सबसे ज़्यादा असर पड़ा तो वो है महिलाएं. 

नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक़, देश में Spousal Violence में भारी इज़ाफ़ा दर्ज किया गया. देश ही दुनियाभर में महिलाओं की समस्याएं बढ़ीं. नौकरियां गंवाने से लेकर, घरेलू हिंसा के केस में हुई बढ़ोतरी तक, 2020 में महिलाओं के विकास को कई समस्याओं ने रोका, उन्हें पीछे धकलने की कोशिश की. 
संयुक्त राष्ट्र संघ के एक्सपर्ट्स का मानना है कि आर्थिक हालत की बिगड़ती स्थिति के मद्देनज़र 2021 में Gender Poverty Gap बढ़ेगा. 
BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार हम एक 'Shecession' में हैं. कोविड19 से मरने वाले ज़्यादातर मरीज़ पुरुष हैं लेकिन पैंडमिक में पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं ने ज़्यादा नौकरियां खोईं.

नज़र डालते हैं 10 कारणों पर जिसके कारण महिलाओं का विकास बुरी तरह प्रभावित हुआ-

1. नौकरी गंवाना 

Source: Rehab Pub

कोविड-19 की वजह से दुनियाभर में लोगों ने नौकरियां गंवाई. हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और टूरिज़्म सेक्टर में काम कर रही कई महिलाओं को नौकरी से हटाया गया. कुछ महिलाओं ने घर पर ध्यान देने के लिए पेड वर्क भी कम किया. एक रिपोर्ट की मानें तो पिताओं की तुलना में इंग्लैंड की 47% वर्किंग मॉम्स ने या तो नौकरी छोड़ी या नौकरी गंवाई. 

केन्या सरकार के मुताबिक़ उनके देश में 12% पुरुषों ने और 20% महिलाओं ने रोज़गार गंवाया. 

2. बाल विवाह 

Source: Malawi Voice

संयुक्त राष्ट्र संघ का ये अनुमान है कि पैंडमिक की वजह से आने वाले दशक में अतिरिक्त 13 मिलियन बच्चों को बाल विवाह हो सकता है. इस कुप्रथा को ख़त्म करने के लिए चलाये गये कई कैंपेन विफ़ल हो जायेंगे क्योंकि कई परिवार ग़रीबी का शिकार होंगे.  

Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार Malawi में बाल विवाह में 350% का इज़ाफ़ा हुआ है.  

3. ट्रैफ़िकिंग 

Source: Legal Service India

बढ़ती ग़रीबी और स्कूल बंद होने की वजह से कई लड़कियों ने स्कूल छोड़ा. संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा से दूर होने की वजह से महिलाओं और लड़कियों का यौन शोषण बढ़ा है और इससे उनके ट्रैफ़िकिंग में फंसने के चांस बढ़ गये है. जिन देशों में तेज़ी से अर्थव्यवस्था गिरी है वहां ट्रैफ़िकिंग के केस बढ़ेंगे, ठीक वैसे ही जैसा 2007-2008 फ़ाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान हुआ था.  

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, कंबोडिया से चीन में होने वाली 'ब्राइड ट्रैफ़िकिंग' बढ़ गई है.  
दुनियाभर में साइबरसेक्स ट्रैफ़िकिंग के केस भी बढ़े हैं. इसमें बच्चों और महिलाओं के सेक्शुअल एक्ट्स को दुनिया में कहीं भी मौजूद क्लाइंट्स के लिए लाइव स्ट्रीम किया जाता है. साइबर सेक्स ट्रैफ़िकिंग का केन्द्र बिंदु माना जाने वाले देश, फ़िलिपिन्स में भयंकर तरीक़े से केस बढ़े हैं, कहती है 10 Thousand Windows की एक रिपोर्ट.  

4. घरेलू हिंसा 

Source: The Conversation

देश और दुनिया में लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई. संयुक्त राष्ट्र संघ का अंदेशा है कि पैंडमिक की वजह से घरेलू हिंसा के मामले 20% तक बढेंगे.  

कई जगहों के हेल्पलाइन नंबर्स ने आने वाले हेल्प कॉल्स में पांच गुना इज़ाफ़ा दर्ज किया. कई देशों ने होटल और हॉलिडे स्पेस को रिफ़्यूजी स्पेस में बदला.

5. अनपेड लेबर 

Source: King's College London

ये समस्या नई नहीं है. महिलाओं और पुरुषों के वेतन में ज़मीन आसमान का फ़र्क है, चाहे कोई भी फ़िल्ड हो. घरेलु कामकाज के लिए तो दुनिया की किसी भी महिला को कुछ भी नहीं मिलता. संयुक्त राष्ट्र संघ के डेटा के अनुसार 2020 में महिलाओं का अनपेड लेबर बढ़ा. घरवालों का ध्यान रखने से लेकर, बीमार घरवालों का ध्यान रखने तक, महिलाओं ने दूसरे सालों से ज़्यादा ऊर्जा ख़र्च की. 5 अमीर देशों में किए गये सर्वे के अनुसार, पैंडमिक के दौरान महिलाओं ने हफ़्ते में 65 घंटों तक अनपेड लेबर किया.  

6. महिला शिक्षा 

Source: YouTube

पैंडमिक की वजह से दुनियाभर में स्कूल बंद कर दिए गए. इस निर्णय का सबसे ज़्यादा असर लड़कियों की शिक्षा पर पड़ा क्योंकि लाखों लड़कियां अब कई स्कूल नहीं जा पाएंगी. स्कूल बंद होने से लड़कियों के साथ होने वाली सेक्शुअल हिंसा, लड़कियों के ट्रैफ़िकिंग के केस और बाल विवाह भी बढ़े.

कई देशों में टीन प्रेगनेंसी की संख्या बढ़ी है.

7. गर्भपात 

Source: Foreign Policy

BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, पोलैंड के टॉप कोर्ट ने हर क़िस्म के गर्भपात पर रोक लगा दी थी. इसके विरोध में देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए.  

Malawi में भी एक सशक्त धार्मिक संगठन गर्भपात आसान बनाने वाले एक बिल का सख़्त विरोध कर रहा है.  
कोविड-19 की वजह से लगे ट्रैवल रेस्ट्रिकशन्स की वजह से गर्भवात करवाने में भी समस्याएं आईं. क्लिनिक्स और हेल्थकेयर सेंटर्स पर भी प्रेशर बढ़ा.  

8. मातृ स्वास्थ्य 

Source: Mint Pro

प्रेगनेंसी और जन्म देने की वजह से मौत का शिकार होने वाली महिलाओं की संख्या में 2000 से अब तक एक तिहाई गिरावट दर्ज की गई है लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैंडमिक की वजह से ये संख्या बढ़ सकती है. इस साल कई महिलाओं को कन्ट्रासेप्शन और रिप्रोडक्टिव हेल्थकेयर नहीं मिला पाया.  

अमेरिका के रिप्रोडक्टिव हेल्थ रिसर्च संस्थान,The Guttmacher Institute का अनुमान हेल्थ सर्विस में ज़रा भी डिसऑर्डर आने से 15 मिलियन अनचाही प्रेगनेंसी, 28 हज़ार मैटरनल मौत और 3.3 मिलियन अनसेफ़ अबॉर्शन हो सकते हैं. कोविड-19 की वजह से कई क्लिनिक्स, आउटरीच प्रोग्राम्स बंद हो गये थे. फ़ैक्ट्रीज़ बंद होने की वजह से भी कन्ट्रासेप्टिव पिल्स प्रोडक्शन दर घटी थी.  

9. रिवेंज पॉर्न 

Source: The Guardian

Safer Internet Center Ex-Partner या Abusive Partner द्वारा रिवेंज पॉर्न, इंटीमेट तस्वीरों की ऑनलाइन पोस्टिंग की शिकायतों में इज़ाफ़ा दर्ज किया गया. ब्रिटेन की एक हेल्पलाइन सेवा के अनुसार अप्रैल में उनके पास आने वाले केस दोगुने हो गये.

फ़्रांस में एक एक्टिविस्ट ने #stopfisha नाम से कैंपेन शुरू किया. इस कैंपेन का मक़सद था विक्टिम्स को अब्यूज़ रिपोर्ट करने में मदद करना.
मोरक्को में एक सोशल मीडिया कैंपेन ने कई रिवेंज पॉर्न विक्टिम्स को लड़ने की शक्ति दी.  
कुछ महिलाओं को Ex Partners, Abusive Partners ने परेशान किया तो कुछ महिलाओं के अकाउंट्स हैक करके अजनबियों ने निजी तस्वीरें हासिल की.  

10. फ़ीमेल जेनाइटल म्युटिलेशन (एफ़जीएम)

Source: Time

यूनाइटेड नेशन्स पॉपुलेश फ़न्ड (यूएनएफ़पीए) की एक रिपोर्ट के अनुसार 2020 में 4.1 मिलियन लड़कियों और महिलाओं का एफ़जीएम होने की आशंका है.

पूर्वी और पश्चिमी अफ़्रिका में लॉकडाउन के दौरान एफ़जीएम के कई केस सामने आए. ऐसे क्षेत्रों में कई माता-पिता को लगता है कि 'एफ़जीएम' करवाने से उनके बेटी को अच्छा दामाद मिलेगा.
सोमालिया में 'एफ़जीएम' करने वालों ने घर-घर जाकर लड़कियों का खतना करने की पेशकश की.  
Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, मिस्त्र के एक पिता ने अपनी तीन बेटियों को जबरन खतना करवाया. डॉक्टर और पिता पर क़ानूनी कार्रवाई की गई. एफ़जीएम मिस्र में ग़ेरक़ानूनी है.