दिल्ली, जिसमें ना जाने कितने ही लोग एक अच्छी और बेहतर ज़िन्दगी का ख़्वाब लेकर आते हैं. दिल्ली का दिल बड़ा है, इस शहर में सबके लिए जगह बन जाती है… पर दिल्ली के लोग?

सोमवार रात को उज़्बेकिस्तान की एक महिला को दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज इलाके से 2 कारसवारों ने उठा लिया. महिला ने पुलिस को बताया कि वो साकेत के एक मॉल में गई थी और वहां से 9:30 बजे करीब उसने एक ऑटो लिया. लेकिन वसंत कुंज पहुंचते ही ऑटो ख़राब हो गया और ऑटोवाले ने उसे दूसरी गाड़ी लेने को कहा.

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महिला दूसरे ऑटो के लिए इंतज़ार कर ही रही थी कि एक सफ़ेद कार आई और उस कार में बैठे 3 लोगों ने महिला को जबरन अंदर खींच लिया. 2 कार सवारों ने महिला का बलात्कार किया और फिर खिड़की एक्सटेंशन के पास उसे छोड़ दिया. महिला ने वहां से PCR को मदद के लिये बुलाया.

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पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ़ केस दर्ज कर लिया है और इस मामले में कुछ गिरफ़्तारियां भी की हैं. समझ नहीं आता कि लोग कभी कुछ अच्छा करने का क्यों नहीं सोच सकते. सोचने वाली बात है कि वो ऑटोवाला उस महिला को एक अन्य गाड़ी ढूंढने में मदद कर सकता था, पर उसने इंसानियत के नाते भी उस महिला की मदद नहीं की. कुछ लोग उस महिला पर भी सवाल उठाएंगे. पर ये बात तो तय है कि ये देश महिलाओं का देश नहीं है.

Source: India Times