कभी दिल्ली कभी गुरुग्राम, कभी कोलकाता तो कभी पुणे ऐसा लगता है मानो पूरे देश में मासूम बच्चों की सुरक्षा एक प्रश्नचिन्ह लग गया है. कभी किसी बच्चे के साथ स्कूल में बलात्कार होता है तो कभी उसकी हत्या कर दी जाती है. लेकिन क्यों आखिर ऐसा क्या हो गया है, जो शिक्षकों की छत्र-छाया में बच्चे सुरक्षित नहीं, बल्कि डर महसूस करने लगे हैं? बीते दिनों गुरुग्राम के स्कूल में हुई प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या की ख़बर पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है, वहीं अब पुणे से तीन साल के मासूम की पिटाई का मामला सामने आया है.

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ये घटना पुणे के पिम्पले गुरव इलाके की है. इस मासूम को इतनी बर्बरता से पीटा गया है कि न ही वो देख पा रहा है और न ही चल. इस बच्चे को अनुशासन सिखाने के लिए उसकी ट्यूशन टीचर ने पीटा है. वो टूशन टीचर इतनी निर्दयी हो गई कि मार-मार कर बच्चे की आंखें ही सुजा दीं, जिस वजह से बच्ची की आंख तीन दिनों तक सूजी रहीं.

बच्चे के पेरेंट्स ने पुणे के सांघवी पुलिस स्टेशन में टीचर भाग्यश्री (30) के खिलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है. सीनियर इंस्पेक्टर वरिष्ठ अजय चांडशेड़े ने कहा, ‘बच्चे के पेरेंट्स ने बताया कि जब उनका बच्चा प्राइवेट ट्यूशन से घर लौटा तब उसकी आंखो पर बहुत ही ज्यादा सूजन थी और आंखे नीली पड़ गईं थीं. जब उससे पूछागया गया तब उसने बताया कि टीचर ने उसे लकड़ी के स्केल से हाथों, सिर और पीछे बहुत मारा है.’

पुलिस ने ये भी बताया कि वो टीचर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने में पहले हिचकिचा रहे थे क्योंकि वो टीचर बच्चे के इलाज का खर्च उठाने को तैयार थी. पुलिस ने मारपीट और बच्चे के साथ अत्याचार के लिए बाल न्याय अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया और अब आरोपी टीचर पुलिस की गिरफ़्त में है.

इलाज के लिए बच्चे को एक मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के चाइल्ड केअर वार्ड में भर्ती कराया गया.

पूरी घटना का वीडियो आप यहां देख सकते हैं.

https://www.youtube.com/watch?v=Xcl4DbG8Ktc

टीचर ने बच्चे को क्यों इस तरह से मारा-पीटा ये बात अभी तक सामने नहीं आई है. पर वजह चाहे कोई भी और कितनी भी बड़ी क्यों न हो लेकिन क्या एक मासूम को इतनी बुरी तरह पीटा जाना चाहिए.

यहां पर एक सवाल ये भी उठ रहा है कि आखिर तीन साल के बच्चे को कौन ट्यूशन के लिए भेजता है?

Source: beingindian