उत्तराखंड राज्य भूकंप संभावित क्षेत्र में बसा है. ऐसे में इमारतों का भूकंप रोधी होना बहुत ज़रूरी है. राज्य के हज़ारों स्कूल्स की इमारतें खस्ता हाल में हैं. उन्हें भूकंप रोधी बनाने के लिए राज्य का शिक्षा विभाग बांस का सहारा लेने जा रहा है.

दरअसल, बांस रिएक्टर स्केल पर 8 तक की तीव्रता वाले भूकंप को झेलने की क्षमता रखता है. सभी प्रकार के मौसम को आसानी से टोलरेट कर सकता है. सबसे बड़ी बात इससे इमारत बनाने की लागत में 50 फ़ीसदी की कमी आ जाती है.

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बांस की इन्हीं क्वालिटीज़ को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के शिक्षा विभाग ने राज्य के 4500 स्कूल्स की बिल्डिंग को रि-कंस्ट्रक्ट यानी पुनर्निमाण करने का फ़ैसला किया है. राज्य के शिक्षा विभाग के अनुसार, इस समय राज्य में क़रीब 17000 सरकारी विद्यालय हैं. राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग ने ऐसी इमारतों को चिन्हित किया है, जिनकी मरम्मत की जानी है.

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इस बारे में बात करते हुए School Education Secretary आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा- 'असुरक्षित और कमज़ोर स्कूल बिल्डिंग्स को चिन्हित कर लिया गया है. ग्रेड-4 जिसमें असुरक्षित इमारतों को रखा गया है, राज्य में ऐसे 4500 स्कूल हैं. वहीं ग्रेड-5 जिसमें अत्यधिक असुरक्षित इमारतों को रखा जाता है, ऐसे स्कूलों की संख्या 528 है. इनके पुनर्निमाण कार्य की शुरुआत जल्द ही हो जाएगी.'
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शिक्षा विभाग आने वाले शैक्षणिक सत्र में ऐसे 100 स्कूलों की मरम्मत करने की योजना बना रहा है. विभाग के अनुसार देहरादून के 12 स्कूलों के पुनर्निमाण का कार्य अगले महीने शुरू किया जा सकता है. इसके लिए विभाग के पास 5 करोड़ रुपये का बजट है. ज़रूरत पड़ने पर राज्य के वित्त मंत्रालय से आर्थिक सहायता लेने का फ़ैसला भी लिया गया है.

उत्तराखंड के Bamboo And Fiber Development Board के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज चंद्रन ने बताया कि उनका प्लान पुरानी कक्षाओं की जगह बांस से बनी नई कक्षाएं बनाने का है. बोर्ड ने ही स्कूलों के पुननिर्माण के लिए बांस का इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव रखा था.