कोरोना वायरस के चलते देशभर में जारी लॉकडाउन के कारण महानगरों में फंसे लाखों प्रवासी मज़दूरों की घर वापसी के लिए भारतीय रेलवे ने हाल ही में ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ की सेवाएं शुरु की. बावजूद इसके प्रवासी मज़दूरों की समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं. 

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1- ट्रेन में 4 दिन तक मज़दूर की लाश लावारिश पड़ी रही

दरअसल, श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में प्रवासी मज़दूरों की मौत का सिलसिला जारी है. ताज़ा मामले में एक प्रवासी मज़दूर की लाश ट्रेन में 4 दिन तक लावारिश पड़ी रही. 27 मई को झांसी रेलवे यार्ड में ट्रेन की सफ़ाई के दौरान कर्मचारी को एक मज़दूर का शव मिला. मृतक मज़दूर की पहचान मोहन लाल शर्मा (37) के रूप में हुई, जो नवी मुंबई स्थित एक चिप्स की फ़ैक्ट्री में ड्राइवर थे. 

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बताया जा रहा है कि मोहन लाल शर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश में बस्ती ज़िले के रहने वाले थे. 21 मई को वो झांसी जाने के लिए मुंबई से एक निजी बस में बैठे थे. इसके बाद 23 मई को झांसी से गोरखपुर तक के लिए ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ में सवार हुए, जो बस्ती से क़रीब 70 किलोमीटर दूर है. मोहन के शव के पास मिले टिकट में प्रस्थान का समय सुबह 11:40 बजे दिखाया गया है. 

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पूर्वोत्तर रेलवे के चीफ़ पीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि, ट्रेन 24 मई को शाम 4 बजे गोरखपुर पहुंची थी. झांसी-गोरखपुर ट्रेन की यात्रा में आमतौर पर लगभग 11 घंटे लगते हैं. गोरखपुर में सभी यात्रियों के उतरने के बाद खाली ट्रेन क़रीब दो घंटे बाद शाम 6:20 बजे झांसी के लिए रवाना हो गई. ट्रेन 27 मई को सुबह 7:30 बजे झांसी पहुंची. इसके कुछ घंटे बाद शर्मा का शव झांसी रेलवे यार्ड में ट्रेन के किसी टॉयलेट के अंदर मिला. 

2- भूख और प्यास प्रवासी महिला मज़दूर की मौत

हाल ही में गुजरात से चली ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ में सवार होकर बिहार के लिए निकली एक प्रवासी महिला मज़दूर का शव बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म पर पड़ा हुआ मिला. इस महिला की मौत भी भूख और प्यास के चलते हुई थी. इस दौरान रेलवे ने महिला के घरवालों व पुलिस को सूचित करने के बजाय महिला के शव को प्लेटफ़ॉर्म पर ही एक कपड़े से ढक कर छोड़ दिया था. इस महिला के साथ में उसके दो मासूम बच्चे भी थे. 

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3- पानी नहीं मिलने से डीहाइड्रेशन के कारण गई जान

मुंबई से ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ के ज़रिए लखनऊ लौट रहे 33 वर्षीय इबरार अहमद की पानी न मिलने डीहाइड्रेशन से मौत हो गयी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इबरार की मौत ब्रेन हैमरेज के कारण हुई बताया गया. इबरार के परिवार का कहना है कि मुंबई से लखनऊ तक 36 घंटे से अधिक समय तक के लिए बिना पानी और ट्रेन में पंखे नहीं चलते से वो डीहाइड्रेशन का शिकार हो गया था.

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4- शौचालय का पानी पीने के लिए किया मजबूर

महाराष्ट्र से यूपी आ रही एक ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ को बुनियादी सुविधाओं के बिना ही महाराष्ट्र के कई स्टेशनों पर घंटों रोकना पड़ा. इस दौरान भूख-प्यास से परेशान 2 प्रवासी मज़दूरों को शौचालय का पानी पीने के लिए मजबूर किया गया. 

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रेलवे अधिकारियों ने इस संबंध में एक डेटा शेयर करते हुए कहा कि, अब तक ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ में 80 प्रवासी मजदूरों की मौत हुई है. ये सभी मौतें 9 से 27 मई के बीच हुई हैं. इस दौरान 23 मई को 10 मौत, 24 मई को 9 मौत, 25 मई को 9 मौत, 26 मई को 13 मौत, 27 मई को 8 लोगों की मौत हुई थी. इनमें से 11 मौतों को लेकर दूसरे कारण बताए गए हैं. जिनमें पुरानी बीमारी या फिर अचानक बीमार पड़ने का हवाला दिया गया है. इनमें से एक शख्स की मौत का कारण कोरोना संक्रमित होना बताया गया है. 

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‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ में प्रवासी मज़दूरों की मौत के पीछे का सबसे बड़ा कारण है रेलवे की अनदेखी. यात्रा के दौरान रेल विभाग द्वारा यात्रियों को न तो खाने-पीने की सुविधा दी जा रही है न ही उन्हें इमरजेंसी मेडिकल सुविधा मिल पा रही है. इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की अनदेखी भी की गई. 

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गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में श्रमिक ट्रेनों के रास्ता भटकने की कई ख़बरें भी आ चुकी हैं, जिसके बाद मज़दूरों को लेकर चिंता बढ़ गई है. मीडिया में इस तरह की ख़बरें भी आ रही हैं कि 1 दिन का सफ़र तय करने वाली ट्रेन 4 या 5 दिन का समय ले रही है. हाल ही में गुजरात के सूरत से निकली एक ट्रेन क़रीब 9 दिन के बाद बिहार पहुंची थी.   

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बीते गुरुवार को प्रवासी मज़दूरों के संकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी. इस दौरान अदालत ने निर्देश दिया था कि प्रवासी मज़दूरों से घर वापसी का कोई भी पैसा नहीं लिया जाएगा, फिर चाहे वो बस या फिर ट्रेन के ज़रिए ही क्यों ना हो. 

केंद्र सरकार की मानें तो अब तक कुल 3700 ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ चल चुकी हैं. इस दौरान क़रीब 91 लाख मज़दूरों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाया जा चुका है.