किसी भी आम दिन के तरह दफ़्तर में काम-काज चल रहा था. सब तरफ़ प्रेम दिवस की चर्चाएं हंसी-मज़ाक. दिल्ली में तो मौसम भी काफ़ी सुहाना हो रहा था. इन सब के बीच दूर उत्तर में कुछ जवान ज़िन्दगी और मौत के बीच लड़ रहे थे. ख़बरें आने लगी कि जम्मू-कश्मीर हाइवे पर सीआरपीएफ़ काफ़िले पर हमला किया गया है. बम विस्फ़ोट के बाद गोलीबारी की भी ख़बरें आने लगी.

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22 साल के आतंकवादी ने दिया हमले को अंजाम

कुछ घंटों बाद घटना की ज़िम्मेदारी लेने वाले ने भी अपना वीडियो जारी कर दिया. प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की ज़िम्मेदारी ली और सुसाइड बॉम्बर का वीडियो भी डाला. वीडियो में 22 साल का एक लड़का बात कर रहा था. ख़बरों से ये भी पता चला कि घटनास्थल से सिर्फ़ 10 किलोमीटर दूर ही आदिल अहदम दार का घर था. आदिल ने विस्फ़ोटक पदार्थों से भरी स्कॉरपियो को सीरआपीएफ़ बस से टकरा दिया और अत्मघाती हमले में 42 बेक़सूर जवानों की जान ले ली.

आदिल की ये तस्वीर कई न्यूज़ साइटों पर दिख रही है.

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TOI की रिपोर्ट के मुताबिक आदिल सालभर पहले जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा था. घटना के बाद रिलीज़ किए गए वीडियो में वो कह रहा है:

'सालभर इंतज़ार करने के बाद मुझे जैश में शामिल होने का मौका मिला. जब तक ये वीडियो आप तक पहुंचेगा तब तक मैं जन्नत में रहूंगा. कश्मीरियों के लिए ये मेरा आख़िरी पैगाम है. जैश ने जंग जारी रखी है. आओ जैश में शामिल हो जाओ और आख़िरी जंग की तैयारी करो...'

आदिल अपने परिवारों और दोस्तों को इस्लाम के लिए अपनी शहीदी का जश्न मनाने को कह रहा है. इस वीडियो के वायरल होने के बाद ही कई 'कश्मीरी और पाकिस्तानी' सोशल मीडिया अकाउंट्स भी चालू हो गए और सोशल मीडिया पर जैश की सराहना कर दी गई.

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काफ़िले के गुज़रने के लिए कड़ी थी सुरक्षा

एक रिपोर्ट के अनुसार सीआरपीएफ़ जवानों के काफ़िले की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की गई थी. IEDs से बचाव के लिए RoP (Road Opening Party) ने सुरक्षा चेक की थी. किसी संभावित हमले के लिए चौकन्ना रहने के साथ ही सीआरपीएफ़ ने आम नागरिकों को भी उस रास्ते से गुज़रने की अनुमति दी थी, जिस रास्ते से उनका काफ़िला गुज़रने वाला था.

साआरपीएफ़ अधिकारियों का कहना है कि आदिल ने इसी मौके का फ़ायदा उठाया.
रिपोर्ट्स के अनुसार 8 फरवरी को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बड़ा आतंकी हमला होने की आशंका जताई थी और एक नोटिस भेजा था.

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ट्रेनिंग/छुट्टियों से लौट रहे थे जवान

सीआरपीएफ़ के 2547 जवान/अफ़सर 78 बसों, जीप और हथियारबंद गाड़ियों में जम्मू से दक्षिण कश्मीर की ओर जा रहे थे. इनमें से कुछ जवान छुट्टियों से लौट रहे थे और कुछ ट्रेनिंग पूरी कर के. पिछले 6 दिनों से जम्मू-श्रीनगर हाइवे बंद था इसीलिए जवान पोस्टिंग पर समय से नहीं पहुंच पाए थे.

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अंतर्राष्ट्रीय नेताओं ने की घटना की निंदा

पुलवामा आतंकी हमले में जहां हर देशवासी की आंखें नम हैं, वहीं अंतर्राष्ट्रीय नेताओं और संगठनों ने भी हमले की निंदा की है. फ़्रांस, रूस, अमेरिका, भूटान, मॉरिशस के जनप्रतिनिधियों ने हमले पर शोक जताया है.


इस हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि.