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70 साल से अधिक उम्र की दो बहनें, दस साल तक अपने अंतिम दिनों के लिए छोटे-मोटे काम कर पैसे इकट्ठा करती रहीं. दोनों ने मिलकर 46,000 रुपये जोड़े थे. ख़ून-पसीने की मेहनत से इकट्ठा किए गए ये पैसे बंद हो चुके 1000-500 के नोट के रूप में थे.

थंगामल(78) और रंगामल(75) बहनें तमिलनाडु के त्रिपुर ज़िले के एक पिछड़े इलाके में रहती हैं. उन्होंने इन पैसों को इलाज़ के लिए और अंतिम संस्कार के लिए बचा कर रखा था. उन्हें कोई जानकारी नहीं थी कि सरकार ने इन नोटों क तीन साल पहले ही बंद कर दिया है.

ये मामला तब लोगों के सामने आया जब दोनों बहनों को इलाज़ की ज़रूरत पड़ी और उन्होंने रिश्तेदारों को बताया कि उन्होंने ऐसे समय के लिए पैसे बचा कर रखे थे. रंगामल के पास 24,000 रुपये और उसकी बड़ी बहन थंगामल के पास 22,000 रुपये थे.

रिश्तेदारों ने बताया कि दोनों बहने छोटे-मोटे काम इन पैसों को इकट्ठा किया था. इन्हें 2016 में किए गए नोटबंदी के बारे में जानकारी नहीं थी.