बीते मंगलवार को क़रीब 50 दिनों के लंबे इंतज़ार के बाद दिल्ली से देश के 15 शहरों के लिए यात्री ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया. इस दौरान पिछले 4 महीनों से दिल्ली-एनसीआर में फ़ंसे हज़ारों लोग घर जाने के लिए कई किमी पैदल चलकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे. 

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दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू किए बिना ही विशेष ट्रेन सर्विस शुरू कर दी गई, ऐसे में जिसको जो साधन मिला, वो उसी से रेलवे स्टेशन पहुंचा. इस दौरान अधिकतर लोग ऐसे भी थे, जो बुलंदशहर, मानेसर और फ़रीदाबाद से 60 से 65 किमी की पैदल दूरी तय करके नई दिल्ली स्टेशन पहुंचे. 

इन सभी यात्रियों में बड़ी तादाद उन स्टूडेंट्स और प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले युवाओं की थी, जिनके शिक्षण संस्थान और दफ़्तर लंबे समय से बंद पड़े हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में फ़ैक्ट्रियों में काम करने वाले मज़दूर व अन्य छोटे-मोटे काम धंधे करने वाले लोग भी इन ट्रेनों से अपने घर के लिए रवाना हुए. 

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इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले के रहने वाले राहुल सुरेश ने बताया कि वो मानेसर स्थित मारुति के मैन्युफ़ैक्चरिंग प्लांट में काम करता है. लॉकडाउन के बाद से ही प्लांट बंद है और पिछले एक-डेढ़ महीने से सैलरी भी नहीं मिली है. ऐसे में घर का किराया देना भी मुश्किल हो रहा है. 

जब मुझे स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की जानकारी मिली तो मैंने तुरंत टिकट बुक करा लिए, लेकिन मानेसर से दिल्ली तक आने के लिए मुझे कोई साधन ही नहीं मिला, इसलिए खाना, पानी और अन्य सामान पैक करके अपने दो अन्य साथियों के साथ पैदल ही नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के लिए निकल पड़ा. हम मानेसर से सोमवार रात क़रीब 12 बजे चले थे और रात भर 60 किमी पैदल चलने के बाद सुबह क़रीब 11 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंच गए थे. 

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इसी तरह छत्तीसगढ़ के बेमेतरा ज़िले के रहने वाले दौलत राम भी दिल्ली के जहांगीरपुर से पैदल ही नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे. दौलत राम जहांगीरपुरी स्थित एक जूते-चप्पल की फ़ैक्ट्री में मज़दूरी करते थे. लॉकडाउन की वजह से फ़ैक्ट्री बंद हुई तो उनका कामकाज भी ठप हो गया. रिश्तेदारों से पैसा उधार लेकर पत्नी, दो बच्चों और ख़ुद के लिए टिकट बुक किये. 

इस दौरान गुड़गांव, फ़रीदाबाद, नोएडा और गाज़ियाबाद में रहने वाले कई लोग ऐसे भी थे जो प्राइवेट टैक्सी बुक करके नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे. इस दौरान इन लोगों को इसके लिए मोटी रकम भी चुकानी पड़ी. 

IIT दिल्ली के छात्र आयुष पटेल ने बताया कि लॉकडाउन के बाद उन्हें हॉस्टल खाली करना पड़ा, उस वक्त घर जाने का कोई साधन नहीं था, इसलिए उन्हें गुड़गांव में अपने एक दोस्त के पास रुकना पड़ा. इस दौरान गुड़गांव से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक लाने के लिए प्राइवेट टैक्सी वाले ने उनसे 1500 रुपये वसूले. 

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वहीं शाहदरा से अपने तीन साथियों के साथ टैक्सी लेकर आईं, स्मृति तिवारी ने बताया कि उन लोगों से टैक्सी वाले ने 1500 रुपये वसूले. 

जबकि एक अन्य छात्र रिकेश सिंह ने बताया कि उनसे भी टैक्सी वाले ने नोएडा से नई दिल्ली स्टेशन तक के 1200 रुपये लिए.