पीरियड्स से जुड़े मिथकों को दूर करने में एक तरफ़ जहां समाज के कुछ सिपाही जी-जान लगा रहे हैं, वहीं हमारे समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो समाज को पीछे धकेलने का काम कर रहे हैं. पीरियड्स मिथक से जुड़ी एक शर्मनाक ख़बर आई है गुजरात के भुज से.


Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक़, 
बीते सोमवार को भुज के श्री शरजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट की कई लड़कियों के Undergarments उतरवाए गए. क्यों? इस बात की जांच करने के लिए कि किसे पीरियड्स आ रहे हैं. 

Source: Ahmedabad Mirror

ये हरकत किसी और ने नहीं इंस्टीट्यूट की ही प्रिंसिपल रीता रानीगा और शिक्षिकों ने की.


Times of India से बात-चीत करते हुए एक छात्रा ने बताया, 'ये मेंटल टॉर्चर था और मेरे पास इसे बताने के लिए शब्द नहीं हैं.'  

Ahmedabad Mirror के मुताबिक़, होस्टल रेक्टर ने प्रिंसिपल से शिकायत की थी कि हॉस्टल की लड़कियां धार्मिक नियमों का उल्लंघन कर रही हैं ख़ासतौर पर पीरियड्स वाली लड़कियां. 

Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, कच्छ यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने कुलपति, दर्शना ढोलकिया समेत 5 सदस्यों की टीम का गठन किया है. 

हम छात्रों और कॉलेज प्रशासन से बात करेंगे. जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी. 

                    - कुलपति ढोलकिया

छात्राओं के मुताबिक़ ये सब गार्डन होस्टल में एक गंदे पैड के बरामद किए जाने के बाद शुरू हुआ. कॉलेज के पीरियड्स नियम का उल्लंघन करने वाली 'दोषी' लड़की को ढूंढने के लिए प्रिंसिपल और शिक्षिकाओं ने सबके कपड़े उतरवा दिए.


ये इंस्टीट्यूट स्वामीनारायण मंदिर, भुज को अनुसरण करने वालों ने खोला है. कॉलेज में लगभग 1500 छात्राएं हैं जिनमें से 68 दूर-दराज़ के गांवों से हैं और कैंपस होस्टल में रहते हैं.  

स्वामीनारायण पंथ के पीरियड्स से जुड़े कुछ नियम-क़ानून मानते हैं. जैसे- पीरियड्स में लड़कियां मंदिर या रसोई घर में नहीं घुस सकतीं. पीरियड्स वाली लड़कियां दूसरी लड़कियों को छू भी नहीं सकतीं. हॉस्टल प्रशासन ने प्रिंसिपल रीता से शिकायत कर दी कि पीरियड्स वाली कुछ लड़कियां न सिर्फ़ दूसरी लड़कियों को छूती हैं बल्कि मंदिर और रसोई घर में भी घुसती हैं.


Ahmedabad Mirror से बातचीत में एक छात्रा ने बताया, 'होस्टल प्रशासन ने बुधवार को हम पर इल्ज़ाम लगाया और हमें बेइज़्ज़त किया. गुरुवार को जब हम लेक्चर में थे तब रेक्टर अंजलिबेन ने प्रिंसिपल को बुलाया और हमारी शिकायत की. हमें क्लासरूम से निकलने पर मजबूर किया गया और बाहर लाइन बनाने को कहा गया. प्रिंसिपल ने हमें बुरा-भला कहा और पूछा कि हम में से किसे पीरियड्स हो रहे हैं. जिन 2 लड़कियों को पीरियड्स हो रहा था वो अलग खड़ी हो गईं.'  

इसके बावजूद लड़कियों को बाथरूम में ले जाया गया और वहां महिला शिक्षिकाओं ने लड़कियों के Undergarments उतरवाए और चेक किया.


एक अन्य छात्रा ने ये भी बताया कि प्रिंसिपल और रेक्टर उन्हें हमेशा परेशान करती रहती हैं. हमें पीरियड्स होने की सज़ा मिलती है. धार्मिक नियमों का पालन करने के बावजूद ऐसा होता है. 

छात्राओं के माता-पिता पुलिस में शिकायत करने की सोच रहे हैं. अभी तक पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है.