बंगाल की खाड़ी में उठे तूफ़ान अम्फ़न ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लाखों लोगों की ज़िन्दगियां उजाड़ दी. तूफ़ान तो चला गया और पीछे छूट गया बर्बादी का ख़तरनाक मंज़र


अम्फ़न द्वारा मचाई तबाही का जायज़ा लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार सुबह, पश्चिम बंगाल पहुंचे. मोदी के साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई मंत्री भी थे.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अम्फ़न के वजह से मरने वालों की संख्या 77 हो गई है.


अम्फ़न की तबाही का आंकलन किया जा रहा है, बताया जा रहा है कि इसने आयला से ज़्यादा तबाही मचाई है.

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता समेत 7 ज़िलों में अम्फ़न ने तबाही मचाई. कई इलाक़ों में बिजली नहीं है, मोबाईल नेटवर्क नहीं है. राज्य सरकार ने 1000 करोड़ का राहत फ़ंड बनाया है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक़, 88,000 हेकटेयर की धान की खेती, 1 लाख हेकटेयर सब्ज़ियों की खेती का नुक़सान हुआ है. बंगला को हज़ारों करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ है.


रिपोर्ट्स के अनुसार, ओडिशा में अम्फ़न से 45 लाख घरों को नुक़सान हुआ है. मुख्यमंत्री पटनायक ने 7 दिनों के अंदर नष्ट हुए घरों, खेती आदि की रिपोर्ट मांगी है.

एनडीआरएफ़ की टीम राहत कार्य में लगी है लेकिन मृत देह की बरामदी का सिलसिला भी जारी है.


कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट से पानी में बह गई किताबों की दयनीय तस्वीरें सामने आईं-

वहीं सुंदरवन को भी ख़ासा नुक़सान होने की ख़बरें भी आ रही हैं.

कुछ लोगों का ये भी मानना है कि नेशनल मीडिया बंगाल और ओडिशा में फैली तबाही को तवज्जो नहीं दे रहा है.