'कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है, के जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिए'

'इन आंखों कि मस्ती के, मस्ताने हज़ारों हैं'
'दिखाई दिए यूं के बेख़ुद किया है'

रेडियो, कैसेट या फिर किसी रीमेक में ज़रूर सुने होंगे. सहादबहार ये गाने(ओरिजनल) जब भी कानों में पड़ते हैं मिश्री सी घुल जाती है. जिन फ़िल्मों के ये गाने हैं वो आपने देखे हों या न हों पर ये गाने ज़रूर सुने होंगे.

Music director Khayyam
Source: Jansatta

इन लफ़्ज़ों को संगीत से सजाया था, मोहम्मद ज़हूर ख़य्याम उर्फ़ ख़य्याम ने.

19 अगस्त, 2019, रात के तकरीबन 9:30 बजे मुंबई के एक अस्पताल में ख़य्याम साहब ने आख़िरी सांस ली, वे 93 साल के थे. 28 जुलाई से वे ICU में भर्ती थे.

RIP Khayyam
Source: The Hindu

इस ख़बर के बाद ही बॉलीवुड, हिन्दी गानों के शौक़ीनों में शोक़ की लहर दौड़ गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट के ज़रिए शोक व्यक्ति किया-

उस दिग्गज संगीतकार को याद करते हुए हम पेश कर रहे हैं उनके कुछ गीत-

1. कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है- कभी कभी

अमिताभ बच्चन, राखी, शशि कपूर अभिनीत इस फ़िल्म को 3 फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड मिले थे. कहा जाता है कि यश चोपड़ा ने ख़य्याम साहब से इस फ़िल्म की सफ़लता के लिए दुआ करने को कहा था और इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे.

2. इन आंखों की मस्ती के- उमराव जान

उमराव जान के सभी गानों को ख़य्याम साहब ने ही बनाए थे. गीतों पर रेखा की अदा ने अलग ही जादू बिखेरा. फ़िल्म के कंपोज़र कोई और थे, निर्देशक से कुछ मतभेद होने के बाद फ़िल्म के गीतों को सुर से सजाने का दायित्व ख़य्याम साहब के कंधों पर आया. उमराव जान के संगीत के लिए ख़य्याम साहब को फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड और नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड दोनों मिले.

3. दिखाई दिए यूं- बाज़ार

ये गीत सुप्रिया पाठक पर फ़िल्माया गया, वही 'खिचड़ी' वाली. इस फ़िल्म में उनकी अलग ही अदाकारी दिखी. मीर तक़ी मीर के लफ़्ज़ों को ख़य्याम ने कुछ इस कदर सुर और ताल से बांधा कि बस... सुनने वाले के लिए लम्हें वहीं ठहर से गए.

4. ए दिल-ए-नादां- रज़िया सुल्तान

रज़िया सुल्तान के इस गीत के लफ़्ज़ हैं, जां निसार अख़्तर और निदा फ़ाज़ली के. गाने को सुरों से पिरोने के लिए निर्देशक कि पहली पसंद थे, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल. निर्देशक ने उन्हें एक गाने पर दोबारा काम करने को कहा. जब निर्देशक उनसे मिलने गए तो उन्हें इंतज़ार करवाया गया. निर्देशक से ये इंतज़ार बर्दाशत नहीं हुआ और संगीत का दायित्व ख़य्याम साहब के कंधो पर आ गया.

5. आ जा रे ओ मेरे दिलबर आ जा- नूरी

नूरी बॉक्स ऑफ़िस पर ज़बरदस्त हिट हुई. जां निसार अख़्तर के लफ़्ज़ों में ख़य्याम साहब ने जब अपने सुर बुने तो जो बनकर आया वो अब तक सुना जा रहा है और आगे भी सुना जाएगा.

6. कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता

1981 में आई ये एल्बम सुपरहिट हुई. यूं कहें कि ख़य्याम साहब के संगीत और भूपिंदर सिंह की आवाज़ ने ग़ज़ल के शौक़ीनों के दिल में कभी न भरने वाली जगह बना ली.

7. वो सुबह कभी तो आएगी- फिर सुबह होगी

इस फ़िल्म के लिए साहिर लुधियानवी ने खय्याम का नाम सुझाया था. इस फ़िल्म में संगीत देने के लिए उन्हें राज कपूर के 'टेस्ट' को पास करना पड़ा था. फ़िल्म के दो गाने, 'चीन ओ अरब हमारा' और 'वो सुबह कभी तो आएगी' दर्शकों के बीच मशहूर हुए.

8. आंखों में हमने आपके सपने सजाए हैं- थोड़ी सी बेवफ़ाई

इसी फ़िल्म में गुलज़ार और ख़य्याम ने साथ काम किया. उनके काम को दर्शकों ने बेहद पसंद भी किया. 'हज़ार राहें मुड़ के देखीं', 'आज बिछड़े हैं' ने भी लोगों के दिल में ख़ास जगह बनाई.