नॉर्वे की मस्जिद में हमले के इरादे से आये हथियार बंद शख़्स को 65 साल के एक बुज़ुर्ग ने अपनी सूझ बूझ से धर दबोचा. इस जांबाज़ बुज़ुर्ग शख़्स का नाम मोहम्मद रफ़ीक़ है. रफ़ीक़ पाकिस्तान की मिलिट्री में ऑफ़िसर रह चुके हैं.

दरअसल, रविवार को नॉर्वे के बेरुम स्थित 'अल-नूर इस्लामिक सेंटर' में एक हथियार बंद शख़्स हमले के इरादे से मस्जिद के कांच के दरवाजे को तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था. तभी मोहम्मद रफ़ीक़ की नज़र उस पर पड़ी और वो बिना हथियार के ही हमलावर से भिड़ गए. रफ़ीक़ उस वक़्त अपने दो साथियों के साथ नमाज़ पढ़ने आए हुए थे. हमलावर को काबू में करने के लिए रफ़ीक़ के दोस्तों ने भी उसका साथ दिया.

संदिग्ध का नाम 21 वर्षीय Philip Manshau बताया जा रहा है, जो स्थानीय निवासी है. हमले के वक़्त वो ड्रेस के साथ साथ बॉडी आर्मर पहने हुए था. वो हथियार के दम पर नमाज़ वाली जगह तक पहुंचकर अधिक से अधिक लोगों को निशाना बनाने की फ़िराक में था. उस वक़्त मस्जिद में कई लोग 'ईद अल-अधा' त्योहार को मनाने की तैयारियों में जुटे हुए थे.

मोहम्मद रफ़ीक़ ने बताया कि जब मेरे साथी ने मोहम्मद इकबाल ने उसके सिर पर किसी चीज़ से हमला किया तो मैंने उस हमलावर को पकड़ लिया.

ऑनलाइन मैसेजिंग बोर्ड के मुताबिक़, Philip Manshau क्राइस्टचर्च हमले के शूटरों Poway and El Paso से प्रेरित एक चरमपंथी है.

जांच में जुटी पुलिस इसे आतंकी हमले के रूप में देख रही है. संदेह के तौर पर उसने एक 21 वर्षीय स्थानीय शख़्स को गिरफ़्तार किया है. इस शख़्स पर अपनी 17 वर्षीय सौतेली बहन की हत्या का आरोप भी है.

इस साहसिक कार्य के बाद मोहम्मद रफ़ीक़ लोगों के बीच हीरो बन चुके हैं. मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक हर कोई उनकी बहादुरी को सलाम कर रहा है.