कोरोना वायरस देश के 33 राज्यों केंद्र शासित प्रदेशों तक फैल चुका है. ये ख़तरनाक वायरस अब तक उत्तर पूर्व के 7 में से 6 राज्यों में दस्तक दे चुका है. नागालैंड देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जो अब भी इस वायरस से अछूता है.

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इस बीच मणिपुर में ग्रामीणों ने सरकार की मदद के बिना ही सामूहिक प्रयास से क़्वारंटीन सेंटर के रूप में बांस की 80 झोपड़ियां तैयार की हैं. ताकि महानगरों से लौट रहे लोगों को यहां ठहराया जा सके.

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बीते बुधवार को ज़िला प्रशासन ने जानकारी दी कि मणिपुर की राजधानी से लगभग 115 किलोमीटर दूर सेनापति ज़िले के तुंगजॉय गांव के ग्रामीणों ने सरकार से कोई वित्तीय सहायता लिए बिना ही क़्वारंटीन सेंटर के रूप में 80 से अधिक बांस व घास फूस की झोपड़ी तैयार की हैं.

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मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह समेत कई अन्य लोगों ने भी ग्रामीणों के इस शानदार प्रयास की सराहना की है.

मुख्यमंत्री ने एन बीरेन सिंह ट्वीट कर कहा कि, तुंगजॉय गांव के ग्रामीणों को मेरा सलाम! अब स्थानीय प्रशासन की मदद से प्रत्येक झोपड़ी में 1 बेड, टॉयलेट, गैस टेबल, बिजली और पानी की सुविधा दी जा रही है. झोपड़ियों के आस-पास आवश्यक वस्तुओं को रखा जा रहा है.

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पिछले कुछ दिनों से महानगरों में फँसे राज्य के हज़ारों लोग बसों व छोटे वाहनों से मणिपुर लौट रहे हैं. ऐसे में इन लोगों का 14 दिन तक क़्वारंटीन सेंटर में रहना अनिवार्य है, इसलिए राज्य के सभी 60 विधानसभा क्षेत्रों में कम से कम एक क़्वारंटीन सेंटर खोला गया है.

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हाल ही में 'गुड समैरिटन पहल' के तहत मणिपुर के एक अन्य दूरदराज के गांव में हज़ारों लोगों को मुफ़्त में सब्ज़ियाँ बाँटकर मिसाल कायम की थी. कांगपोकपी ज़िले के ईसाई बहुल गांव कोंसखुल के लोगों ने अपने पड़ोसी गांव के हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सब्जियां बांटी थीं.

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जानकारी दे दें कि मणिपुर में कोरोना वायरस के अब तक केवल 2 मामले सामने आए हैं. ये दोनों मरीज़ ठीक भी हो चुके हैं. हाल ही में मणिपुर के एक शख़्स की कोरोना से मुंबई में मौत हो गई थी. वहीं दिल्ली में भी 8 मणिपुरी नर्स कोरोना पॉज़िटिव पाई गई हैं.