पहले जीन्स

फिर स्कर्ट

अब नाइटी

महिलाओं के कपड़ों पर चर्चा सिविल सोसाइटी के कुछ ज्ञानियों के पसंदीदा कामों में से एक है. जीन्स, स्कर्ट के बाद अब चर्चा का विषय बनी है नाइटी. मम्मी लोगों का सबसे आरामदायक परिधान.

आंध्र प्रदेश के गोदावरी ज़िले के थोकालापल्ली गांव में एक अजीब सा क़ानून बनाया गया है. क़ानून के तहत सूरज ढलने से पहले महिलाएं नाइटी (या इस जैसे परिधान) पहनकर गांव में नहीं निकल सकती.

बात हज़म करने में दिक्कत होगी. इसीलिए ये तस्वीर देखिए

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दादी को नाइटी पहनने में शर्म आ रही थी इसीलिए पोते ने साथ दिया.

गांव के बड़े-बुढ़ों ने क़ानून बनाया है कि सुबह के 6 बजे से शाम के 7 बजे तक महिलाएं नाइटी पहनकर नहीं निकल सकती. जिस महिला ने ये क़ानून तोड़ा, उसे गांव की विकास कमिटी को 2000 रुपए जुर्माना देना होगा. इसके साथ ऐसा करने वाली महिला के बारे में जानकारी देने वाले को 1000 रुपए का ईनाम भी दिया जाएगा.

HT के मुताबिक, ये नियम लगभग 7 महीने पहले लागू किया गया था. निदामार्रु ब्लॉक थाना के सब-इंस्पेक्टर एम.विजय कुमार को इस नियम के बारे में एक ग़ुमनाम ख़त से पता चला.

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सब-इंसपेक्टर ने जांच करवाई, जिसमें पता चला कि गांव कमिटी को पुरुषों ने एक चिट्ठी द्वारा बताया कि नाइटी में घूमती महिलाओं को देखकर वे असहज महसूस करते हैं. कमिटी ने मीटिंग बुलाई जिसमें कुछ महिला संगठन भी शामिल थे. सबकी सहमति से ही ये क़ानून बनाया गया.

गांव कमिटी के सदस्या भाले सीतारामुडू ने पुलिस को बताया कि ये नियम Women Self-Help Group ने ही बनाया है और पुरुषों का इसमें कोई हाथ नहीं है. उन्होंने ये भी बताया कि अभी तक किसी भी महिला पर जुर्माना नहीं लगाया गया है.

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सब-इंस्पेक्टर ने कहा,

हमने उन्हें शिक्षित करने की कोशिश की. हमने ये बताया कि महिलाओं पर इस तरह का बैन लगाना क़ानून अपराध है. हम फिर से उस गांव जाएंगे और ऐसे नियमों के खिलाफ़ कैंपेन चलाएंगे.

जीन्स, स्कर्ट के बाद अब नाइटी भी पुरुषों को असहज महससू करवा रही है. ये लोग आंखों में गुलाब जल क्यों नहीं डालते, आंखें साफ़ हो जाएंगी. मन के मैल का तो कुछ किया नहीं जा सकता!