देशभर में लॉकडाउन के बाद ग़रीब दिहाड़ी मज़दूरों की ज़िंदगी हाशिए पर है. सरकारें चाहे कितने भी दावे क्यों न कर ले, लेकिन सच्चाई तो यही है कि ग़रीबों को 24 घंटे में एक बार खाना मिल जाए तो बड़ी बात है. हालांकि, इस मुश्किल समय में कई लोग ज़रूरतमंदों की मदद के लिए आगे आए हैं.

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दिल्ली के तिमारपुर से 'आम आदमी पार्टी' के विधायक दिलीप पांडे ने लॉकडाउन के दौरान 8 दिन के बच्चे के साथ भूख से तड़प रही एक मां तक मदद पहुंचाई. एनडीटीवी पर इस महिला की रिपोर्ट देखने के बाद दिलीप बच्चे और उसकी मां की हालत को लेकर काफ़ी परेशान हो गए थे.

इसके तुरंत बाद दिलीप पांडे ने इस संबंध में राज्य सरकार से संपर्क किया. बीते मंगलवार दिलीप ख़ुद राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के तहत नॉर्थ दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में भोजन वितरण का जायजा लेने गए. इस दौरान उन्होंने इस क्षेत्र के ग़रीबों के लिए पके हुए भोजन की व्यवस्था कराई.

इस दौरान दिलीप को 8 दिन के बच्चे की मां महक भी मिलीं. 22 वर्षीय प्रवासी मज़दूर महक की दुर्दशा देख दिलीप हैरान रह गए. 8 दिन पहले बच्चे को जन्म देने वाली महक को 2 दिन में सिर्फ़ एक बार ही भोजन मिल पा रहा था. जब भूख लगती है, तो वो पानी पी लेती थीं. इसके बाद उन्होंने बच्चे और उसकी मां के लिए सभी व्यवस्थाएं की.

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मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले महक और उनके पति गोपाल दिल्ली में प्रवासी मजदूरों के रूप में जीविकोपार्जन करते हैं. वो तीन सप्ताह से देशभर में घोषित लॉकडाउन के चलते भुखमरी की कगार पर पहुंचे हज़ारों लोगों में से हैं.

एनडीटीवी से बातचीत में महक ने कहा-

हमारे पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है, बच्चे के लिए दूध नहीं है. हमारे पास न तो पैसा है, न ही कोई काम. थोड़ा सा चावल बचा है अब उसी से गुज़ारा करना पड़ेगा. इलाके में जो लोग खाना बांटने आते हैं, मेरे पति उन्हीं के साथ काम कर रहे हैं.
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महक आगे कहती हैं कि, बेटी के जन्म के समय उनके पास अस्पताल पहुंचने तक के संसाधन भी नहीं थे. न ही अब हम बच्ची को डॉक्टर के पास लेकर जा पा रहे हैं. हमने दिल्ली आकर बहुत बड़ी ग़लती कर दी.