जम्मू-कश्मीर से 'आर्टिकल 370' हटाए जाने से तिलमिलाए पाकिस्तान के 'सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय' ने 'Say No to India' कैंपेन की शुरुआत की है.

इस कैंपेन के तहत पाकिस्तान ने भारत के साथ सांस्कृतिक संबंधों पर पाबंदी लगाने का फ़ैसला किया है. साथ ही दोनों देशों की एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बीच सभी तरह के जॉइंट वेंचर्स को भी ख़त्म करने का निर्णय लिया है.

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Gulf News की रिपोर्ट में पीएम इमरान ख़ान की सूचना सहायक फ़िरदौस आशिक अवान ने कहा कि 'पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेग्युलेटरी अथॉरिटी' ने भारतीय कॉन्टेंट पर रोक लगाने का फ़ैसला किया है. इसके साथ ही भारतीय डीटीएच उपकरणों की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है.

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फ़िरदौस ने कहा कि भारतीय एंटरटेनमेंट कंटेंट से पाकिस्तान के युवा भ्रमित हो रहे हैं. भारत एक तरह से पाकिस्तान पर सांस्कृतिक आक्रमण कर रहा है और पाकिस्तान की मीडिया को इससे निपटने की कोशिशें करनी चाहिए.

फ़िरदौस ने आगे कहा कि, सरकार ने पाकिस्तान के सिनेमाघरों में भारतीय फ़िल्मों की रिलीजिंग पर भी प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, बॉलीवुड ने कहा कि इससे पाकिस्तान का ही नुकसान होगा.

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इसके साथ ही 'राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद' ने एक ग्रुप बनाने का फ़ैसला लिया है. इस समूह में कई मंत्रियों को भी शामिल किया जाएगा जो हर मोर्चे पर हिंदुत्व की विचारधारा के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ेगा.

ये पहली बार नहीं हो रहा जब पाकिस्तान ने भारतीय कंटेंट पर प्रतिबंध लगाया है. इससे पहले भी इसी साल फ़रवरी में भारतीय वायुसेना द्वारा बालाकोट में किये हवाई हमले के बाद 'पाकिस्तान फ़िल्म एक्ज़िबिटर्स एसोसिएशन' ने भारतीय फ़िल्मों का बहिष्कार किया था.