असफ़लता से डर कर जो बैठ गया, वो कुछ नहीं कर पाता और जो असफ़लता से उभर गया वो विजय वर्धन कहलाता है. दरअसल, विजय वर्धन ने हर उस इंसान को आस दे दी है, जो सिविल सर्विस की परीक्षा को एक बार में नहीं पास कर पाए हैं.

विजय वर्धन 35 बार सरकारी नौकरियों की परीक्षा दे चुके हैं और हर बार असफ़ल रहे, लेकिन कोशिश करनी नहीं छोड़ी. इसके बाद साल 2018 में विजय की कोशिश रंग लाई और UPSC की सिविल सर्विस की परीक्षा में 104 रैंक हासिल कर विजय वर्धन ने विजय हासिल की.

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विजय हरियाणा के सिरसा ज़िले के रहने वाले हैं. साल 2019 से पहले विजय चार सिविल सर्विस एग्ज़ाम के चार अटेंप्ट दे चुके थे.

विजय ने बताया

उनके दोस्त और परिवारवाले चाहते थे कि वो ये अटेंप्ट न दें, लेकिन विजय ने हार नहीं मानी. इसके बाद पांचवे अटेंप्ट में उन्हें अपनी मंज़िल मिल गई. विजय ने साल 2013 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन से इंजीनियरिंग की है.

उनका कहना था

मैं साल 2013 में सिविल सर्विस की कोचिंग करने दिल्ली आया था. साल 2014 में मैंने आईएएस की प्रारंभिक परीक्षा के बाद मेन्स की परीक्षा दी, लेकिन असफ़ल रहा. इसके बाद 2015 में फिर मेन्स की परीक्षा दी और असफ़ल रहा.

- विजय वर्धन

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विजय की असफ़लता का सिलसिला थमा नहीं. साल 2016 में भी विजय ने मेन्स की परीक्षा क्वालिफ़ाई कर इंटरव्यू तक पहुंच गए. मगर सिर्फ़ 6 नंबर से रह गए थे. साल 2017 में वो फिर इंटरव्यू स्टेज में पहुंचने के बाद फिर असफल हो गए. विजय राजस्थान सिविल सर्विस, हरियाणा सिविल सर्विस, UPSC, SSC CGL में भी फ़ेल चुके हैं.

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उन्होंने बताया

मैं काफ़ी कम मार्क्स से परीक्षा में रह जाता था. अगर परीक्षा में पास भी हो जाता तो कभी मेडिकल स्टैंडर्ड तो कभी डॉक्यूमेंट वेरिफ़िकेशन के कारण रह जाता था. ऐसे में मेरे मन में ख़्याल आता था कि मैं ही क्यों?

- विजय वर्धन

मगर आज सिलेक्शन के बाद जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो मुझे एहसास होता है कि वो सभी असफ़लताएं मेरे लिए मील का पत्थर साबित हुईं हैं. इन्हीं असफ़लताओं ने मुझे यहां तक पहुंचाया है.

'कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती' और विजय इस बात की जीती जागती मिसाल हैं.