आज़ादी के 72 साल बाद आज पाकिस्तान में मौजूद गुरुद्वारा चोआ साहिब को फिर से खोला जाएगा. पाकिस्तान के झेलम ज़िले में मौजूद ये गुरुद्वारा बंटवारे के बाद से ही बंद पड़ा था. इसे गुरु नानक जी की 550वीं जयंती के उपलक्ष में सिख श्रद्धालुओं के लिए खोला जा रहा है.

1947 में बंटवारे के बाद गुरुद्वारा चोआ साहिब के प्रबंधक भारत में आ गए थे. उसके बाद से ही ये गुरुद्वारा बंद पड़ा था. पाकिस्तान के रोहतास किले के पास मौजूद इस गुरुद्वारे का निर्माण महाराजा रंजित सिंह ने 1934 में करवाया था.

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इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, Pakistan Sikh Gurdwara Prabhandhak Committee (PSGPC) ने आज इसे फिर से खोले जाने का ऐलान किया है. इसके अध्यक्ष सतवंत सिंह ने बताया कि इस गुरुद्वारे को अरदास(प्रार्थना) के साथ खोला जाएगा और यहां गुरु ग्रंथ साहिब की स्थापना की जाएगी.

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ऐसा कहा जाता है कि गुरु नानक जी तिल्ला जोगियन(Tilla Jogian) मंदिर से लौटते समय यहां पर ठहरे थे. उस वक़्त यहां पर सूखे जैसे हालात थे और लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे थे. कहते हैं कि यहां पर गुरु नानक जी ने प्रार्थना की थी, जिसके बाद एक चोआ (पानी का झरना) उत्पन्न हो गया था.

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PSGPC के एक मेंबर ने इस बारे में बात करते हुए कहा-'विभाजन के बाद से ही ये गुरुद्वारा बंद पड़ा था क्योंकि इसकी देख-रेख के लिए कोई नहीं था. अब इसे रिनोवेशन के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोला जा रहा है. पाकिस्तान में मौजूद करीब 25000 सिखों को यहां तक पहुंचने में आसानी होगी. पाकिस्तान के चार मुख्य शहर लाहौर, रावलपिंडी, इस्लामाबाद और पेशावर से यहां पहंचने में सिर्फ़ 2-4 घंटे का ही समय लगता है. ये पाकिस्तान में सिख विरासत को संरक्षित करने का एक और उदाहरण है.'

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PSGPC ने मार्च 2016 में पेशावर के भाई बीबा सिंह गुरुद्वारे को फिर से खोला था. कमेटी बहुत जल्द ही पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मौजूद गुरुद्वारा श्री खारा साहिब को भी खोलने का प्लान बना रही है.