समलैंगिक समुदाय अभी भी समाज में अपनी स्वीकार्यता के लिए संघर्षरत है. एक लंबे संघर्ष के बाद भले ही भारत में अब क़ानूनी रूप से समलैंगिकता अपराध नहीं है. मगर समाज में अपने हक़ और अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई अभी जारी है. संघर्षों को पार कर इतिहास रचने वाली एक ऐसी ही ट्रांसजेंडर महिला हैं ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान (Aishwarya Rituparna Pradhan). ये वो शख्सियत हैं, जिनके सपनों ने समाज की रूढ़िवादी सोच के आगे दम नहीं तोड़ा. अपने स्कूल के टीचर से बेइज्ज़त होने और अपने कॉलेज होस्टल की दोस्तों द्वारा यौन शोषण किए जाने के बाद, ऐश्वर्या की इन सभी मेंटल ट्रामा से बाहर आने की यात्रा एक कठिन परीक्षा से कम नहीं थी. आज उन्हें ओडिशा फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ में पहली ट्रांसजेंडर सिविल सर्वेंट के रूप में जाना जाता है. 

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Aishwarya Rituparna Pradhan

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ओडिशा के छोटे गांव से ताल्लुक़ रखती हैं ऐश्वर्या 

ऐश्वर्या ओडिशा के कंधमाल जिले के गांव कतिबागेरी की रहने वाली हैं. उन्होंने छठी कक्षा में ख़ुद के जेंडर ओरिएंटेशन की पहचान फ़ीमेल के रूप में की थी. लेकिन इसके बाद उनकी परेशानियां कम होने के बजाय बढ़ती चली गईं. उनकी क्लास में उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया. जहां स्कूल में एक शिक्षक को बच्चे को सपोर्ट करना चाहिए, वहीं इसके उलट उनके सेक्सुअल ओरिएंटेशन के चलते उनके टीचर्स उनकी बेइज्ज़ती करते थे. इसके बावजूद ऐश्वर्या ने अपने हौसलों को कमज़ोर नहीं पड़ने दिया और अपनी स्कूलिंग कंप्लीट की. जब वो स्टेट सिविल सर्विसेज़ की तैयारी करने लगीं, तब उनकी क्षमता पर भी सवाल उठाए गए. उन्होंने अपना ग्रेजुएशन इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन से किया है और लोक प्रशासन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है. ऐश्वर्या अपने एक इंटरव्यू में बताती हैं, 

टीचर्स स्कूल में अलग होने के चलते मेरी बेइज्ज़ती करते थे. कॉलेज में भी ज़िंदगी आसान नहीं थी. भुवनेश्वर में मेरी पोस्ट ग्रेजुएशन के दिनों के दौरान एक बार मेरे होस्टल के लोगों ने मेरा यौन शोषण किया था. स्टेट सिविल सर्विसेज़ में आने के बाद, लोग मेरे कर्तव्यों को निभाने की मेरी क्षमताओं को लेकर आशंकित रहते थे. लेकिन अब पहले से चीज़ें थोड़ी आसान हो गई हैं.
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सिविल सेवक बनने के बाद कराया जेंडर ट्रांसफॉर्मेशन

साल 2010 में एक पुरुष के रूप में प्रतिष्ठित राज्य सिविल सेवाओं में आने के बावजूद, एक ट्रांसजेंडर के रूप में अपनी पहचान बनाने में उन्हें पांच साल से अधिक समय लगा. उनकी उस दौरान पोस्टिंग बतौर मेल अफ़सर पारादीप पोर्ट टाउनशिप में हुई थी. सुप्रीम कोर्ट के ट्रांसजेंडर को तीसरे जेंडर के रूप में मान्यता देने के बाद, उन्होंने तुरंत अपना जेंडर कानूनन रूप से एक पुरुष से महिला में बदलने का फ़ैसला किया. फिर उन्होंने लिंग परिवर्तन के लिए आवश्यक कागज़ी कार्रवाई पूरी की और अपने लिए एक नाम के रूप में ‘ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान‘ (Aishwarya Rituparna Pradhan) को चुना. 

उन्होंने बताया था, 

मेरे कपड़ों के बदलाव ने जिस तरीक़े से मैं अपनी ड्यूटी परफॉर्म करती थी, उसने उसे चेंज नहीं किया. शुरुआती उतार-चढ़ावों के बाद, मेरे सभी सुपीरियर, सहकर्मी और सबऑर्डिनेट्स ने मुझे एक्सेप्ट किया. मेरे दोस्त और सीनियर अब मुझे मेरे नए नाम से बुलाते हैं, जबकि मेरे सबऑर्डिनेट्स मुझे ‘सर’ की जगह ‘मैडम’ बुलाते हैं.
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ऐश्वर्या का मानना है कि न्याय पालिका एलजीबीटी समुदाय के जीवन को समाज में आसान और अधिक स्वीकार्य बनाने की कोशिश कर रही है, जिस वजह से समुदाय के अच्छे दिन बहुत दूर नहीं हैं.