दुनियाभर में कोरोना महामारी का कहर जारी है. कोरोना की वैक्सीन बनाने के लिए चीन, रूस, इटली, ब्रिटेन, अमेरिका और भारत सहित कई देश काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक एक भी देश ने 100 फ़ीसदी संक्रमण देने वाली वैक्सीन बनाने का दावा नहीं किया है.

दुनिया में कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित अमेरिका कई वैक्सीन पर एक साथ काम कर रहा है. इस बीच अमेरिकी बायोटेक कंपनी मॉडर्ना (Moderna) का दावा है कि उनकी वैक्सीन कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ सुरक्षा देने में 94.5 फ़ीसदी तक कामयाब है. 

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मॉडर्ना के मुताबिक़, ये उनके लिए एक ऐतिहासिक दिन है और वो अगले कुछ सप्ताह में वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू करने के लिए अनुमति मांगने जा रहे हैं. हालांकि, वैक्सीन के बारे में अभी शुरुआती डाटा ही उपलब्ध है और कई अहम सवालों के जवाब मिलने भी बाकी हैं. 

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मॉडर्ना कितनी बेहतर वैक्सीन है? 

इस वैक्सीन का ट्रायल अमेरिका में 30 हज़ार लोगों पर हुआ है, जिनमें से आधे लोगों को 4 सप्ताह के अंतर पर वैक्सीन की दो डोज़ दी गई हैं. जबकि बाकी लोगों को डमी इंजेक्शन दिए गए. जो विश्लेषण पेश किया गया है वो उन पहले 95 लोगों पर आधारित है जिनमें कोविड-19 के लक्षण दिखाई दिए थे. जिन लोगों को वैक्सीन दी गई उनमें से सिर्फ़ 5 को ही संक्रमण हुआ. जिन बाकी 90 लोगों को संक्रमण हुआ उन्हें डमी इंजेक्शन दिए गए थे.  

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कंपनी का दावा है कि ये वैक्सीन 94.5 प्रतिशत लोगों को वायरस से सुरक्षा दे रही है. डाटा से ये भी पता चला है कि, ट्रायल के दौरान 11 लोगों में कोविड का गंभीर संक्रमण पाया गया, लेकिन इनमें से कोई भी ऐसा नहीं था जिसे वैक्सीन दी गई थी. 

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ये वैक्सीन कैसे काम करेगी? 

मॉडर्ना (Moderna) ने आरएनए वैक्सीन बनाई है. इसका मतलब ये है कि कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड का एक हिस्सा शरीर में इंजेक्ट किया जाएगा. ये शरीर में वॉयरल प्रोटीन बनाता है ना की पूरा वायरस. इससे शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली को वायरस पर हमला करने में मदद मिलेगी. ये कोरोना वायरस से लड़ने के लिए शरीर को एंटीबॉडी और प्रतिरोधक प्रणाली के तत्व और टी-सेल का निर्माण करना करेगी. 

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ये वैक्सीन कब मिलेगी? 

मॉडर्ना का कहना है कि, वो अमेरिका में वैक्सीन के इस्तेमाल की अनुमति लेने के लिए अगले कुछ सप्ताह में आवेदन करेगी. कंपनी को उम्मीद है कि वो अमेरिका के लिए 2 करोड़ डोज़ उपलब्ध करवा सकेगी. दुनियाभर के इस्तेमाल के लिए वो अगले साल 100 करोड़ डोज़ तैयार कर पाएगी. कंपनी दूसरे देशों में भी अनुमति लेने की तैयारी कर रही है. 

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क्या इसके साइड इफ़ेक्ट भी होंगे? 

अभी तक सुरक्षा को लेकर कोई अहम चिंता ज़ाहिर नहीं की गई है, लेकिन कोई दवा 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं होती है. पेरासीटामोल भी 200 प्रतिशत सुरक्षित नहीं है. हालांकि, कुछ मरीज़ों में इंजेक्शन के बाद थकान, सिर दर्द और शरीर में दर्द की शिकायतें मिली हैं. 

बता दें कि हाल ही में दवा कंपनी फ़ाइज़र (Pfizer) ने अपनी एक वैक्सीन के 90 फ़ीसदी लोगों पर कामयाब होने की जानकारी दी थी. 

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कौन सी वैक्सीन ज़्यादा कारगर है? 

ये दोनों ही वैक्सीन शरीर में वायरस को इंजेक्ट करके प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित करने के सिद्धांत पर काम करती हैं. इन दोनों ही वैक्सीन का शुरुआती डाटा लगभग एक जैसा ही है. फ़ाइज़र बायोनटैक की वैक्सीन 90 फ़ीसदी सुरक्षा देती है, जबकि मॉडर्ना की वैक्सीन लगभग 94.5 फ़ीसदी. हालांकि, दोनों ही वैक्सीन के ट्रायल अभी चल ही रहे हैं और अंतिम आंकड़े बदल भी सकते हैं. 

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इन दोनों के स्टोरेज की क्या चुनौतियां है? 

मॉडर्ना (Moderna) की वैक्सीन को स्टोरेज करना आसान है, क्योंकि ये शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान पर भी स्थिर रह सकती है. इसे स्टैंडर्ड फ़्रिज़ में महीने तक और डीप फ़्रिज़र में 6 महीने तक रखा जा सकता है. जबकि फ़ाइज़र (Pfizer) की वैक्सीन को शून्य से 75 डिग्री सेल्सियस नीचे रखना पड़ता है और इसे फ़्रिज़ में 5 दिनों के लिए ही रखा जा सकता है. 

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अब दुनियाभर की नज़रें 'मॉडर्ना', 'फ़ाइज़र' और 'स्पुतनिक वी' वैक्सीन पर ही टिकी हुई हैं. मॉडर्ना 94.5 प्रतिशत, स्पुतनिक वी 92 फ़ीसदी जबकि फ़ाइज़र वैक्सीन ने 90 फ़ीसदी सुरक्षा देने का दवा किया है. उम्मीद हैं कि ये तीनों वैक्सीन कोरोना महामारी का अंत करने में मददगार साबित होंगी.