अमेरिकी शोधकर्ताओं ने संक्रमित चूहों के डीएनए से एचआईवी को ख़त्म करके बड़ी सफ़लता हासिल की है. इससे दुनियाभर में एचआईवी संक्रमित करीब 37 मिलियन लोगों में इलाज की आस जगी है.

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'नेचर कम्युनिकेशन' में छपी रिपोर्ट के मुताबिक टेंपल यूनिवर्सिटी के 'लेविस काट्ज़ स्कूल ऑफ़ मेडिसिन' और 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ नेब्रास्का मेडिकल सेंटर' के शोधकर्ताओं ने डीएनए एडिटिंग टूल की मदद से जीवित पशुओं के जीन से एचआईवी के डीएनए को हटाने में सफ़लता हासिल की है. इसके साथ ही शोधकर्ताओं का दावा है कि एचआईवी संक्रमित इंसानों में से एड्स के वायरस को भी हटाया जा सकता है.

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शोधकर्ताओं को ये असाधारण सफ़लता तीन अलग-अलग जीवों के मॉडल में मिली है. इनमें से एक मानवीकृत मॉडल भी था. इस मॉडल में एक चूहे में मानवीय प्रतिरक्षा कोशिकाओं को ट्रांसप्लांट कर उसे एचआईवी के वायरस से संक्रमित किया गया था.

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शोधकर्ताओं की टीम ने सबसे पहले जेनेटिक एडिटिंग तकनीक की मदद से एचआईवी के वायरस को संक्रमित चूहे की प्रतिरक्षा कोशिका से पूरी तरह से हटाकर दिखाया. शोधकर्ताओं ने ट्रीटमेंट को LASER ART का नाम दिया.

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इस टीम ने कई हफ़्तों में धीमी गति से रिलीज के लिए दवा को संशोधित किया. इस दौरान उन्होंने Spleen, Bone Marrow और Brain को टारगेट किया जहां एचआईवी वायरस या निष्क्रिय एचआईवी कोशिकाओं के समूह होने की संभावना अधिक होती है.

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जबकि शोधकर्ताओं ने सब्जेक्ट के डीएनए की संक्रमित कोशिकाओं को पूरी तरह से ख़त्म करने के लिए CRISPR-Cas9 नामक एक जीन एडिटिंग टूल का इस्तेमाल भी किया. इस प्रक्रिया के दौरान शोधकर्ताओं ने 23 में से 9 चूहों से वायरस को सफ़लतापूर्वक समाप्त कर दिया था.

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शोधकर्ताओं की इस सफ़लता के बाद लग रहा है कि जल्द ही दुनियाभर के एचआईवी संक्रमित 37 मिलियन लोग इस जानलेवा बीमारी से निजात पाने की उम्मीद कर सकते हैं.