कोरोना महामारी के दौरान लोगों के काम-धंधे बंद हैं. कुछ लोगों के सामने तो खाने-पीने तक की समस्या खड़ी हो गई है. नागपुर-महाराष्ट्र का हाल तो और भी बुरा है. वहां लगभग 1 महीने से लॉकडाउन लगा है. ऐसे में ग़रीब लोग कैसे अपना पेट भर पाते होंगे. ऐसे लोगों के लिए एक सिख अपने स्कूटर पर लंगर लेकर नागपुर की गलियों में निकलता है. वो गली-गली घूम कर ज़रूरतमंदों को मुफ़्त में भोजन प्रदान कर रहा है.

ये नेक काम कर रहे हैं जमशेद सिंह कपूर जी. वो एक पेशेवर ज्योतिष हैं. वो रोज़ाना लंगर सेवा के तहत दोपहर तीन बजे से लोगों में दाल खिचड़ी बांटते हैं. उनका कहना है कि वो ये लंगर सेवा 2013 से करते आ रहे हैं. इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा- 'इससे पहले केवल ग़रीब लोग खाना लेते थे, लेकिन महामारी और लॉकडाउन के चलते छोटे भोजनालय बंद हैं. इसलिए जिनके पास पैसे हैं और वो कुछ ख़रीदकर खाना चाहते हैं, ऐसे लोग भी इस सेवा का लाभ उठा रहे हैं.'

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नागपुर की गलियों में जमशेद जी को 'लंगर सेवा' लिखी टी-शर्ट पहने लोगों को दाल खिचड़ी परोसते आसानी से देखा जा सकता है. वो अपने स्कूटर के ऊपर खिचड़ी से भरा बर्तन बांध कर घर से निकलते हैं. एक भिखारी भी उनके पास खाना लेने आता था. उसके बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि एक दिन वो उन्हें कपड़ों से भरी एक थैली दे गया. 

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इसे देते हुए भिखारी ने कहा था कि जब उसकी मौत हो जाते तो ये कपड़े वो दूसरे ज़रूरतमंद लोगों में बांट दें. उन्होंने वो थैली रख ली. उसकी मौत के बाद जमशेदजी ने वो थैली खोली तो उसमें कपड़ों के साथ 25000 रुपये भी थे. इसके बारे में भिखारी ने कुछ नहीं बताया था. जमशेद जी बताते हैं उन रुपयों से भी उन्होंने लंगर बनाकर लोगों में बांटा था. कभी अनाज तो कभी सब्ज़ी तो कभी रुपये दान कर उनकी इस लंगर सेवा को जारी रखने में आस-पास के लोग भी मदद करते हैं.

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इस तरह वो अपने लंगर के जरिए रोज़ाना सैकड़ों भूखे लोगों का पेट भरते हैं. जमशेद जी ये लंगर सेवा सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की याद में करते हैं, जिन्होंने 1512 में नागपुर का दौरा कर स्थानीय आदिवासियों को लंगर सेवा प्रदान की थी. जमशेद जी का सपना है कि 24 घंटे लंगर सेवा ग़रीबों के लिए जारी रख सकें.

जमशेद जी भी किसी कोरोना वारियर से कम नहीं.