‘मैं तेरे बगीचे से बहार नहीं, कुछ बीज चुराने आया हूं

मेरा आंगन बड़ा पथरीला है, उसे मिट्टी में समाने लाया हूं’

ये दुनिया ऐसी ही है. एक तरफ़ सदाबहार है, तो दूसरी ओर सिर छुपाने को छांव तक नसीब नहीं है. तपती धरती पर ख़ुद को खड़ा रखने की जद्दोजहद में उम्र बीत जाती है. इन सबके बीच कोरोना महामारी ने हालात बद से बदतर कर दिए हैं. वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन किया गया, जिसे अब 50 से ज़्याद दिन हो गए. हर दिन के साथ पहले से हाशिए पर ज़िंदगी गुज़ार रहे लोगों की हालत पतली होती गई. आलम ये है कि जिन लोगों की मेहनत पर मुल्क़ की ये बुलंद इमारत टिकी है, उन्हें ही आज ख़ुद के लिए एक वक़्त का खाना भी बमुश्क़िल मिल पा रहा है. ऐसे में भी इन लोगों ने अपने ज़मीर को बचा रखा है.  

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दरअसल, अहमदाबाद के जूनागढ़ चौक पर एक मशहूर भोजनायल 'Gajanan Parotha House' है. मंगलवार की रात क़रीब रात के 10 बजकर 30 मिनट पर इस भोजनालय में कुछ चोर घुस आए. इन्होंने वहां से न कोई पैसा चुराया और न ही कोई कीमती सामान. उन लोगों ने बस अपने लिए खाना बनाया, खाया और वहां से रवाना हो गए.  

ये भोजनालाय पिछले 45 सालों से स्थानीय लोगों को स्वादिष्ट खाना परोस रहा है. रेस्टोरेंट के मालिक जीतू टैंक ने बताया कि लॉकडाउन के कारण सड़के एकदम खाली रहती हैं, ख़ासतौर से रात में यहां कोई नहीं आता. इसी का फ़ायदा उठाकर चोर पीछे से किचन में घुस गए.  

जीतू के भाई धर्मेश ने कहा, ‘सीसीटीवी में तीन-चार चोर टॉर्च से भोजनालय का मुआयना करते दिखे. जब उन्होंने सीसीटीवी देखा, तो उसे डिस्कनेक्ट कर दिया. कुछ सेकेण्ड की फ़ुटेज में केवल एक युवक की शक़्ल दिखाई दी. उसके साथ के बाकी लोग नज़र नहीं आए.’  

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उन्होंने आगे कहा, ‘उन लोगों ने किचन में घुसकर खाना बनाया. उन्होंने आटा और आलू का इस्तेमाल किया. साथ ही तेल का पीपा खोला और घी का इस्तेमाल भी किया. पहले उन्होंने खाया और फिर बचे हुए खाने को पैक कर अपने साथ ले गए.’  

चौंकाने वाली बात ये है कि उन्होंने इसके अलावा न कोई सामान छुआ और न ही कुछ चोरी किया. इससे ये साफ़ है कि उनका मकसद सिर्फ़ अपनी भूख मिटाना था. बतौर पुलिस भोजनालय के मालिक ने आधिकारिक तौर पर कोई केस नहीं किया है. ‘उन्होंने सिर्फ़ पुलिस को सूचना दी है, कोई ऑफ़िशियली कंप्लेंट नहीं दर्ज कराई है. ऐसा लगता है कि 3-4 लोग ज़रूर अंदर घुसे हैं. उन्होंने 10 लोगों का खाना बनाया और बचा खाना लेकर वहां से चले गए.’