मुज़फ्फ़रपुर में श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के वॉर्ड्स और पूरा आईसीयू 'चमकी' बुखार से पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों से भरे पड़े हैं. आलम ये है कि एक-एक बिस्तर पर 2-3 बच्चे लेटे हैं.


मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो किसी में 100 बच्चों की मौत और किसी में 200 बच्चों की मौत बताई जा रही है और हालात अभी भी काबू से बाहर हैं. कल Mirror Now की एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें एक बीमार बच्चे का पिता कह रहा था कि उसे मुफ़्त दवाई भी नहीं मिली है.

कई चैनल और अख़बार के पत्रकारों की तरह ही आजतक चैनल की एक्ज़िक्यूटिव एडिटर अंजना ओम कश्यप भी अस्पताल से रिपोर्टिंग कर रही थी.

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि अंजना ICU में घुसकर रिपोर्टिंग कर रही हैं. अस्पताल में डॉक्टर, बिस्तर, नर्स की कमी अंजना जी पहले ही दिखा चुकी हैं. वीडियो में साफ़ नज़र आ रहा है कि जितने भी डॉक्टर, नर्स हैं वो क्षमता से बढ़कर बच्चों का ध्यान रखने की कोशिश कर रहे हैं. अंजना जी अपने सवालों से उनको काम करने से रोक रही हैं. एक नर्स बच्चे को दवाई दे रही है, जिसके बीच में ही अंजना ने अपना माइक घुसा दिया.


बच्चे को देखने जा रहे डॉक्टर को वो पीछे से टोकती हैं, सवाल पर सवाल दागती हैं. (चीखते हुए स्वर में और वो भी ICU के अंदर) पर डॉक्टर को जवाब देने का ठीक से मौका भी नहीं देती.

ये सब ICU में हो रहा है.

सोशल मीडिया पर इस रिपोर्टिंग के लिए अंजना को काफ़ी लताड़ा जा रहा है और इनमें से ज़्यादातर ट्वीट्स में उन्हें भावनाहीन कहा जा रहा है:

ट्वीट्स में ये भी कहा गया कि उन्होंने इतनी ही सख़्ती से भ्रष्ट नेताओं, नोटबंदी और बड़े घोटालों पर सवाल क्यों नहीं किये.


मौके पर जा कर पत्रकारिता करना सही है लेकिन मौके की नज़ाकत को समझना भी एक पत्रकार की ज़िम्मेदारी है.