भारत ने चंद्रयान-2, नासा के मून मिशन से कम पैसों में लॉन्च कर दिया. ISRO 2022 तक भारत का पहला चंद्रमा तक इंसान वाला अंतरिक्षयान भेजने की तैयारी कर रही है.


साफ़ शब्दों में कहें तो देश तरक्की कर रहा है, कई देशों को कई मायनों में पीछे छोड़ रहा है. कुछ नहीं बदल रहा तो वो है देश की सड़कें. सॉरी... गड्ढे. क्योंकि सड़क तो दिखती ही कम है न?

महानगरों की भी सड़कों का हाल बेहाल है. बेंगलुरू की सड़कें तो ऐसी दिखती हैं मानो Moon Craters हों. बद् से बद्तर होतीं सड़कों का हाल देखकर बेंगलुरू के एक आर्टिस्ट ने 'अंतरिक्ष यात्री' बनकर सिस्टम की तीखी आलोचना की.

बादल नंजुन्दस्वामी नामक आर्टिस्ट ने स्पसेसूट पहना और सड़कों पर अंतरिक्ष यात्री जैसे चलने लगा. शुरुआत में देखकर किसी को भी लगेगा कि कोई अंतरिक्षयात्री चांद पर चल रहे हैं पर आख़िर में पता चलती है कि स्पसेसूट वालों म्युनिसिपैल्टी के बनाए गड्ढों पर चल रहा था.

इस तरीके क सोशल मीडिया-

बादल ने पहले भी Art द्वारा बेंगलुरू के पॉटहोल्स की समस्या पर उजागर किया है.