‘बाबा का ढाबा’ चलाने वाले बुज़ुर्ग दंपति की क़िस्मत रातों-रात बदल गई है. जो दंपति कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते दो वक़्त की रोटी भी अपने लिए नहीं कमा पा रहा था, आज उनके ढाबे के बाहर भीड़ उमड़ पड़ी है. ये सब संभव हो सका है, उनके वायरल वीडियो के ज़रिए. जिसमें बुज़ुर्ग शख़्स अपनी परेशानी बताते हुए भावुक हो जाते हैं.

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दिल्ली के मालवीय नगर में ढाबा चलाने वाले कांता प्रसाद और बादामी देवी की मदद के लिए हज़ारों-हज़ार लोगों ने सोशल मीडिया पर अपील की. तमाम लोग मदद के लिए आगे भी आए, जिनमें आम लोगों के साथ ही राजनेता, सेलेब्स और कंपनीज़ भी शामिल हैं.

Zomato ने तो बाबा का ढाबा को लिस्टेट भी कर लिया है. इस बात की जानकारी ख़ुद कंपनी ने ट्वीट कर दी, जिसके बाद ट्विटर पर #zomato भी ट्रेंड होने लगा.

लोगों से इस तरह का रिस्पांस मिलने के बाद कांता प्रसाद काफ़ी ख़ुश हैं. उन्होंने बताया कि, ‘लॉकडाउन के बाद हमारी हालत बहुत ख़राब हो गई थी. हम सुबह 6-7 बजे दुक़ान खोलते थे और 9:30 तक खाना बना लेते थे, लेकिन कोई ग्राहक नहीं आता था. गुरुवार की सुबह मैंने 6 बजे दुकान खोली और 9 बजे तक सारा खाना बिक गया. लोग हमें बहुत प्यार दे रहे हैं. हमारी क़िस्मत रातों-रात बदल गई.’

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उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे और एक बेटी है, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की. वहीं, उनके बेटे आज़ाद हिंद ने बताया कि, ‘लॉकडाउन से पहले मैं एक ऑफ़िस बॉय था, लेकिन मेरी नौकरी चली गई. मैं इस वक़्त काम की तलाश कर रहा हूं.’

बता दें, क़रीब तीन दशक से कांता प्रसाद और उनकी पत्नी बेहद कम क़ीमत पर ढाबा चला रहे हैं. लेकिन लॉकडाउन में उनकी स्थिति बेहद ख़राब हो गई थी. वो अपना बनाया खाना तक नहीं बेच पा रहे थे. वायरल वीडियो में उन्होंने बताया था कि वो बमुश्किल दिन में 70 रुपये तक कमा पाते हैं. अपनी स्थिति बताते हुए बुज़ुर्ग रोने तक लगे थे.

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फिर इस वीडियो को वसुंधरा नाम की एक ट्विटर यूज़र ने शेयर किया, और देखते ही देखते ये वीडियो इतना वायरल हो गया कि लाखों की संख्या में लोग उनकी मदद करने की पेशकश करने लगे. ट्विटर पर #BABAKADHABA ट्रेंड करने लगा था. सोशल मीडिया पर बुज़ुर्ग दंपित की भावुक कहानी ने उनकी पूरी ज़िंदगानी ही बदल दी.