NCRB की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर 8 मिनट में एक बच्चा खो जाता है. लेकिन अगर लोग थोड़ी सतर्कता बरतें तो शायद ये आंकड़ा थोड़ा कम हो सकता है. जैसा कि बेंगलूरू के एक ऑटो ड्राइवर ने किया. उसकी सतर्कता और सूझ-बूझ ये एक 4 वर्षीय बच्ची जो अपने माता-पिता से दूर हो गई थी, वो मिल गई. वो भी चंद घंटों के अंदर.

ये पूरा मामला बेंगलुरू के कोरमंगला इलाके का है. यहां सड़क पर एक 4 साल की बच्ची हाथ में आइसक्रीम लिए रो रही थी. पास से गुज़र रहे ऑटो ड्राइवर माजिद बेग ने उसे देखा तो ऑटो रोक लिया. 

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वो उसके पास गए. वो बच्ची रोते हुए अपनी मां को पुकार रही थी. माजिद ने पहले उससे कन्नड़ में उसके पिता के बारे में पूछा. उसने जवाब नहीं दिया. क्योंकि उसे बस हिंदी आती थी. इसके बाद उन्होंने बच्ची को पहले चुप कराया.

माजिद ने आस-पास के लोगों से पूछा लेकिन कोई उसका पता न बता सका. फिर वो उस बच्ची को सीधे विवेक नगर पुलिस स्टेशन ले गए. यहां पुलिस को सारी बातें बताई. उन्होंने बच्ची के माता-पिता को तलाश करने की कोशिश की पर कुछ नहीं मिला.

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फिर पुलिस ने बच्ची की तस्वीर और माजिद की डिटेल लेकर NGV पुलिस स्टेशन भेज दिया. क्योंकि जहां बच्ची मिली थी वो उस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता था. यहां सारी बातें जानने के बाद पुलिस ने कई गाड़ियों को आस-पास के क्षेत्र में भेजा.

लेकिन वो भी खाली हाथ लौटे. इसी बीच विवेक नगर पुलिस स्टेशन में उसके माता-पिता उसे तलाशते हुए आ गए. वो यूपी के रहने वाले हैं और दिहाड़ी मज़दूर थे. बच्ची की मां ने बताया कि वो कूड़ा फेंकने गई थी कि तभी उसकी बेटी लापता हो गई थी.

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बच्ची की मां ने इस बारे में बात करते हुए कहा-'मैं ऑटो वाले भैया और पुलिस वालों की शुक्रगुज़ार हूं कि उन्होंने मेरी बेटी को बचा लिया. मुझे सबसे अधिक डर ट्रैफ़िक का था कि कहीं उसे कुछ हो ना गया हो.'

माजिद भी दो बेटियों के पिता हैं. इसलिए जब उन्होंने बच्ची को रोते हुए देखा तो वो काफ़ी दुखी हो गए थे. इसलिए उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए बच्ची के माता-पिता को तलाशना शुरू कर दिया था. अच्छी बात ये रही कि पुलिस ने भी उनका पूरा साथ दिया और वो बच्ची अपने माता-पिता से मिल सकी.